नई दिल्ली: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए मुद्रास्फीति दर में गिरावट दर्ज की गई। कृषि श्रमिकों के लिए मुद्रास्फीति दर -0.07% रही, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए यह 0.31% रही।
अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में भी मामूली गिरावट देखी गई। कृषि श्रमिकों के लिए सूचकांक 0.11 अंक घटकर 136.23 हो गया, जबकि ग्रामीण श्रमिकों के लिए यह 0.18 अंक घटकर 136.42 पर पहुंच गया।
मंत्रालय के अनुसार, खाद्य सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई है। सितंबर में कृषि श्रमिकों के लिए यह 0.47 अंक और ग्रामीण श्रमिकों के लिए 0.58 अंक घटा। यह आंकड़े लेबर ब्यूरो द्वारा जारी किए गए हैं, जो 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 787 गांवों से एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित हैं।
नई सीरीज में कई पद्धतिगत बदलाव किए गए हैं, जिससे सूचकांक अब अधिक व्यापक और सटीक माने जा रहे हैं। उपभोग पैटर्न में बदलाव के चलते भार संरचना को संशोधित किया गया है, और अब आंकड़ों की गणना के लिए अर्थमेटिक मीन की बजाय जियोमेट्रिक मीन का उपयोग किया जा रहा है।
इसी बीच, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित भारत की वार्षिक मुद्रास्फीति सितंबर में घटकर 0.13% पर आ गई, जो अगस्त में 0.52% थी। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं और कपड़ों की कीमतों में कमी के कारण हुई है।
फसल उत्पादन में वृद्धि और गेहूं व चावल के पर्याप्त भंडार के चलते खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 1.38% की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति भी सितंबर 2025 में घटकर 1.54% हो गई, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे निचला स्तर है।
निष्कर्ष: सितंबर में महंगाई दर में आई इस गिरावट से आम जनता, खासकर कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को कुछ हद तक राहत मिली है।