बिहार चुनाव 2025: RJD के लिए दुस्स्वप्न, तेजस्वी की सीट तक खतरे में; मात्र 25-26 सीटों पर बढ़त

Bihar Elections 2025: RJD faces a nightmare, even Tejashwi Yadav's seat in danger; lead in just 25-26 seats

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए अब तक का सबसे बुरा सपना बनता जा रहा है। पार्टी न सिर्फ बुरी तरह पिट रही है, बल्कि इसके मुखिया तेजस्वी यादव की अपनी सीट बचाना भी मुश्किल हो गया है। मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे तेजस्वी को अब नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी तक मिलना चुनौतीपूर्ण लग रहा है।

14 नवंबर के ताजा रुझानों में RJD केवल 25-26 सीटों पर आगे है—2020 की 75 सीटों से आधी से भी कम। नेता प्रतिपक्ष का दर्जा पाने के लिए न्यूनतम 24 विधायक जरूरी हैं। अगर RJD जैसे-तैसे 24 सीटें पा भी ले, तो सबसे बड़ा सवाल तेजस्वी की राघोपुर सीट पर है।
16वें राउंड की मतगणना के बाद तेजस्वी 9,000 से अधिक वोटों से पीछे हैं। यहां बीजेपी के सतीश कुमार लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।
जो पार्टी और नेता चुनाव तक बराबरी का दावा कर रहे थे, वे अचानक कैसे धराशायी हो गए? RJD की करारी हार के 5 बड़े कारण:

1. ‘यादव राज’ का डर: 52 यादव उम्मीदवारों का दांव उलटा पड़ा

  • RJD ने 144 सीटों में से 52 (36%) टिकट यादवों को दिए।
  • इससे ‘यादव राज’ की आशंका बढ़ी, गैर-यादव वोट बैंक दूर भागा।
  • अगड़े और अति पिछड़े मतदाता महागठबंधन से छिटक गए।
  • बीजेपी ने ‘RJD का यादव राज’ का नैरेटिव खूब भुनाया।
  • विश्लेषक: यदि 30-35 यादव टिकट तक सीमित रहते, तो कुर्मी-कोइरी वोट 10-15% बढ़ सकते थे (जैसा अखिलेश ने 2024 लोकसभा में किया)।

2. सहयोगियों को ‘भाव’ न देना: गठबंधन टूटा

  • कांग्रेस, वाम दल, छोटी पार्टियाँ नाराज।
  • सीट शेयरिंग में विवाद, वोट ट्रांसफर फेल।
  • तेजस्वी का ‘RJD सेंट्रिक’ अप्रोच, घोषणापत्र का नाम ‘तेजस्वी प्रण’।
  • रैलियों में राहुल गांधी की तस्वीरें गायब, तेजस्वी की भरमार।
  • एनडीए एकजुट, महागठबंधन बिखरा।

3. वादों का ‘ब्लूप्रिंट’ नहीं: जनता ने भरोसा नहीं किया

  • हर घर नौकरी, पेंशन, शराबबंदी समीक्षा—बड़े-बड़े वादे, कोई ठोस योजना नहीं।
  • फंडिंग, समयसीमा, कार्यान्वयन का ब्लूप्रिंट गायब।
  • तेजस्वी: “अगले 2 दिन में ब्लूप्रिंट आएगा”—चुनाव खत्म, ब्लूप्रिंट गायब।
  • अविश्वास की लहर।

4. ‘मुस्लिमपरस्त’ छवि: यादव वोट भी खिसके

  • मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत संभव, पर पूरे राज्य में नुकसान।
  • ‘वक्फ बिल नहीं लागू करेंगे’ का वादा—यादव मतदाताओं को भी चुभा।
  • बीजेपी ने लालू के पुराने वक्फ विरोधी भाषण वायरल किए—फायदा उठाया।

5. लालू की विरासत पर ‘कंफ्यूजन’: कोर वोटर नाराज

  • तेजस्वी लालू का सामाजिक न्याय एजेंडा तो अपनाया, पर ‘जंगल राज’ से डरकर पोस्टर में छोटी तस्वीर।
  • दोहरी नीति उल्टी पड़ी।
  • मोदी: “तेजस्वी लालू के पाप छिपा रहे हैं।”
  • कोर यादव वोटरों में ‘अपमान’ का संदेश।

निष्कर्ष: RJD का यह पतन बिहार की राजनीति में नया मोड़ है। तेजस्वी का भविष्य अब अनिश्चित है—न मुख्यमंत्री, न नेता प्रतिपक्ष, और शायद विधायक भी नहीं।

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