नई दिल्ली: भारत में मानसून के अगले चरण को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। ताजा आकलनों के अनुसार, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसकी प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहा एल नीनो (El Niño) माना जा रहा है, जो भारत के मानसून को प्रभावित कर सकता है।
एल नीनो से क्यों बढ़ती है चिंता?
एल नीनो एक जलवायु संबंधी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। भारत में कई बार एल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ने और वर्षा में कमी देखने को मिली है।
खेती और जल भंडार पर पड़ सकता है असर
अगर अगस्त से अक्टूबर के बीच बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर खरीफ फसलों, सिंचाई, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा में कमी किसानों के लिए चुनौती बन सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है।
मौसम विभाग लगातार कर रहा निगरानी
मौसम वैज्ञानिक एल नीनो की स्थिति और उसके संभावित प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले हफ्तों में समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों के आधार पर मानसून के पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर जारी होने वाले आधिकारिक अपडेट पर ध्यान देना जरूरी होगा।
मौसम की अनिश्चितता से बढ़ी सतर्कता
विशेषज्ञों के अनुसार, एल नीनो का प्रभाव हर बार एक जैसा नहीं होता, लेकिन इसके सक्रिय होने पर मानसून कमजोर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए कृषि, जल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां पहले से तैयारी कर रही हैं, ताकि संभावित प्रभावों से निपटा जा सके।
आगे के पूर्वानुमानों पर रहेगी नजर
फिलहाल वैज्ञानिकों का फोकस अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के मौसम के रुझानों पर है। यदि एल नीनो और मजबूत होता है, तो मानसून के अंतिम चरण में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति आने वाले मौसम संबंधी अपडेट और वैज्ञानिक आकलनों के बाद ही स्पष्ट होगी।