मास्को: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों तेज़ हलचल देखने को मिल रही है। पहले अमेरिका के साथ अलास्का में हुई बातचीत और अब रूस के करीबी देश हंगरी में अगली त्रिपक्षीय बैठक की अटकलों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीतिक स्थिति को और मज़बूत कर दिया है। अगर यह बैठक बुडापेस्ट में होती है, तो विशेषज्ञ इसे पुतिन की एक और बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देख रहे हैं। हंगरी का नाम इस पूरे घटनाक्रम को बेहद खास बनाता है, क्योंकि यह नाटो (NATO) का सदस्य है — वह…
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