पुतिन की कूटनीतिक बढ़त: हंगरी में त्रिपक्षीय वार्ता की संभावनाएं तेज़, बुडापेस्ट बना केंद्रबिंदु

Putin's diplomatic advantage: Prospects of trilateral talks in Hungary brighten, Budapest becomes the focal point

मास्को: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों तेज़ हलचल देखने को मिल रही है। पहले अमेरिका के साथ अलास्का में हुई बातचीत और अब रूस के करीबी देश हंगरी में अगली त्रिपक्षीय बैठक की अटकलों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीतिक स्थिति को और मज़बूत कर दिया है। अगर यह बैठक बुडापेस्ट में होती है, तो विशेषज्ञ इसे पुतिन की एक और बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देख रहे हैं।

हंगरी का नाम इस पूरे घटनाक्रम को बेहद खास बनाता है, क्योंकि यह नाटो (NATO) का सदस्य है — वह सैन्य संगठन जिसका नेतृत्व अमेरिका करता है और जिसे पारंपरिक रूप से रूस का विरोधी माना जाता है। इसके बावजूद, यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही हंगरी ने रूस के प्रति नरम रवैया अपनाया है और कई बार खुले तौर पर उसका समर्थन किया है। हंगरी ने बार-बार यूक्रेन को युद्धविराम और रूस के साथ बातचीत की सलाह दी है।

ऐसे में अगर त्रिपक्षीय बैठक हंगरी में होती है, तो यह पुतिन के लिए एक सहज और अनुकूल वातावरण प्रदान करेगी। पुतिन और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के बीच करीबी संबंध हैं। ऑर्बन ने अमेरिका और रूस, दोनों से रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन उनका झुकाव स्पष्ट रूप से रूस की ओर ज़्यादा रहा है।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आ रहा है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कथित रूप से यह सुझाव दे रहे हैं कि यूक्रेन को युद्ध समाप्ति के लिए क्रीमिया समेत कुछ हिस्से रूस को सौंप देने चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो यह पुतिन के ‘अखंड रूस’ के सपने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

फिलहाल, दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में बुडापेस्ट को अगली अहम वार्ता के लिए अंतिम मंज़ूरी मिलती है या नहीं।

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