पटना (चौथी वाणी) पटना: 19 जुलाई 2026 को साहित्यिक संस्था आयाम हर वर्ष लेखन के क्षेत्र में किसी लेखक के समग्र कृति के लिए उषाकिरण खान कथा साहित्य सम्मान देगा। जिसकी राशि 25 हजार रुपया होगी। इसकी घोषणा आयाम की सचिव वीणा अमृत में आज आयाम के वार्षिक उत्सव में किया। यह पुरस्कार पद्मश्री ऊषाकिरण खान के जन्मदिन किरणोत्सव पर दी जाएगी कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं अनामिका शिल्पी द्वारा मंगलाचरण गायन के साथ हुआ । आयाम की वर्तमान अध्यक्ष डॉ नीलिमा सिंह ने स्वागत भाषण में संस्थापिका अध्यक्ष पद्मश्री ऊषा किरण खान को याद करते हुए सभी का स्वागत किया।
आयोजन के प्रथम सत्र में कवि और प्रखर स्त्रीवादी आलोचक सविता सिंह से जानी मानी कवि निवेदिता ने बात की “समकालीन राजनीतिक परिदृश्य और स्त्री लेखन ” पर बात रखते हुए उन्होंने कहा कि स्त्रियां जो कुछ भी लिख रही है उसका सरोकार राजनीति से है। मेरी चिंता में मनुष्य और प्रकृति है। मैं मानती हूं कि स्त्री प्रकृति के नजदीक है और इस दुनिया को अगर बचना है तो स्त्रियां ही बचा सकती हैं। कोई ऐसी विधा नहीं जिसमें स्त्रियाँ नहीं लिख रहीं, स्त्रियां जो भी लिख रहीं वो सब पॉलिटिकल है क्योंकि राजनीति समाज के लिए होती हैं और स्त्रियां समाज और घर की सृजक ।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए संतोष दीक्षित ने कहा कि स्त्रियों के लिए राजनीति सत्ता की चाहत नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का विस्तार है । उन्होंने मनु भंडारी के महाभोज का जिक्र किया। स्त्री लेखन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आपकी चुप्पी आपकी रक्षा नहीं कर सकती। म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने कहा , ग्रामीण समाज की महिलाओं पर लेखन होना चाहिए।
आयोजन के प्रथम सत्र में कवियत्री एवं समाज सेवी निवेदिता से बातचीत में सविता सिंह ने कहा कि आयाम में उसकी संस्थापिका के प्रति प्रेम को देखकर यह महसूस हुआ कि कुशल नेतृत्व कैसा होता है। उन्होंने कहा स्त्रियों के लेखन में इमैजिनेशन और मेमोरी है, वो उत्तम तरीके से लिख रहीं हैं। मैं इस दुनिया में नॉर्मल नहीं रहती, मैं डायरियां लिखती थी , मैं बॉर्न क्रिटिक और फेमिनिस्ट हूं । मैं समाज के भेदभाव पर बहुत सोचती, इस तरह क्रिटिकल लेखन की शुरूआत हुई । मैं चीटियों के लिए भी सोचती । स्त्री और प्रकृति एक है। जो पुरुष नदियों को प्रेम नहीं करता वो स्त्रियों को प्रेम नहीं कर सकता । मनुष्य का जीवन कई स्तर पर जीया जाता है। बेसिक समस्याओं को अब तक सुलझा लेना चाहिए था, पाब्लो नरु दा की जली हुईं रोटी इसका उदाहरण है। कविता आज के तमाम चीज को उजागर करता है ।हम मनुष्यता से ऊब चुके हैं , हम दैत्य बनना चाहते हैं ।
प्रेम पर बोलते हुए उन्होंने कहा प्रेम भी एक यात्रा है ।
दूसरे सत्र के दूसरी बातचीत सीने अभिनेत्री सोनल झा से सिनेमा समीक्षक एवं थियेटर कलाकार डॉ विमलेंदु ने की। सोनल झा ने कहा अभिनय की ट्रेनिंग जीवन से भी होती है । रंगमंच साहित्य का प्रयोगशाला है । वैसे दर्शकों का टेस्ट भी मायने रखता है। उन्होंने कहा कि आयाम अपने आप में एक नायाब पहल है। युवाओं से अनुरोध किया कि फिल्म देखें और साहित्य पढ़े। रिल्स नहीं देखे।
कार्यक्रम के कविता सत्र में आयाम की सदस्याओं द्वारा कविता पाठ किया जिनके नाम हैं डॉ सिंधु , डॉ रंजीता तिवारी, निवेदिता , डॉ अर्चना त्रिपाठी , उत्तरा सिंह, पूनम आनंद, पूनम कटियार डॉ वीणा अमृत , ऋचा वर्मा , डॉ सुमेधा पाठक, डॉ अनीता सिंह, विभा रानी श्रीवास्तव , डॉ विद्या चौधरी, इति माधवी एवं डॉ जनकमणि सिंह के द्वारा सरस्वती वंदना का गायन किया गया।
इस अवसर पर अतिथि के रूप में पटना के गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से कवि आलोक धन्वा, डॉ तरुण कुमार, आयाम की वरिष्ठ सदस्या डॉ शान्ति शर्मा , डॉ कल्याणी कुसुम,डॉ वरुण, डॉ भावनाशेखर थीं।
तीनो सत्र का मंच संचालन क्रमशः डॉ रंजीता तिवारी, डॉ सुमेधा पाठक एवं इति माधवी तथा धन्यवाद ज्ञापन क्रमशः डॉ ऊषा सिंह, विभा रानी श्रीवास्तव एवं ऋचा वर्मा के द्वारा किया गया।