Gaya News: गुरु पूर्णिमा से शुरू होगा बौद्ध भिक्षुओं का वर्षावास, तीन महीने तक मठों में करेंगे साधना और धम्म चर्चा

Gaya News: Buddhist monks to commence their 'Varshavas' from Guru Purnima; they will engage in spiritual practice and Dhamma discussions in monasteries for three months

बोधगया: बिहार के बोधगया में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं का पारंपरिक वर्षावास (वस्सा) शुरू होगा। भगवान बुद्ध के समय से चली आ रही इस परंपरा के तहत अगले तीन महीने तक भिक्षु और भिक्षुणियां अपने-अपने बौद्ध मठों में रहकर साधना, ध्यान और धम्म चर्चा करेंगे। इस दौरान वे नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।

तीन महीने तक मठों में रहेगा प्रवास

वर्षावास की परंपरा के अनुसार, इस अवधि में बौद्ध भिक्षु सामान्य परिस्थितियों में एक मठ से दूसरे स्थान की यात्रा नहीं करते। वे एक ही स्थान पर रहकर ध्यान, अध्ययन और आध्यात्मिक साधना में समय बिताते हैं। हालांकि, किसी विशेष आवश्यकता की स्थिति में उन्हें सीमित अवधि के लिए बाहर जाने की अनुमति होती है, जिसके बाद उन्हें वापस अपने मठ लौटना होता है।

अहिंसा के सिद्धांत से जुड़ी है परंपरा

बौद्ध परंपरा के अनुसार, भगवान बुद्ध के समय में भिक्षु वर्षभर भिक्षाटन के लिए गांव-गांव भ्रमण करते थे। वर्षा ऋतु में रास्तों पर छोटे-छोटे जीव-जंतु और नई वनस्पतियां उग आती थीं। भ्रमण के दौरान इनके पैरों तले कुचलने की आशंका रहती थी, जो अहिंसा के सिद्धांत के विरुद्ध माना गया। इसी कारण भगवान बुद्ध ने वर्षा ऋतु के दौरान एक स्थान पर रहकर साधना करने की परंपरा शुरू की, जिसे आज भी वर्षावास के रूप में निभाया जाता है।

बोधगया के 100 से अधिक मठों में होंगे विशेष आयोजन

महाबोधि मंदिर के मुख्य भिक्षु के अनुसार, बोधगया में विभिन्न देशों के 100 से अधिक बौद्ध मठों में गुरु पूर्णिमा से वर्षावास की शुरुआत होगी। इस दौरान विशेष प्रार्थना, ध्यान, धम्म प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी इन कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

वर्षावास के बाद होता है महाकठिन चीवरदान

तीन महीने का वर्षावास पूरा होने के बाद बौद्ध समाज में महाकठिन चीवरदान का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु भिक्षुओं को चीवर (वस्त्र) और दैनिक उपयोग की अन्य आवश्यक सामग्री भेंट करते हैं। यह बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।

क्या है वर्षावास?

वर्षावास (Vassa) बौद्ध धर्म की एक प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा है, जिसमें वर्षा ऋतु के दौरान भिक्षु तीन महीने तक एक ही मठ में रहकर ध्यान, अध्ययन, आत्मचिंतन और धम्म प्रचार करते हैं। इस परंपरा का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि अहिंसा, अनुशासन और आत्मसंयम का पालन करना भी है। आज भी भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, नेपाल सहित कई बौद्ध देशों में यह परंपरा श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

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