पटना : पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मतदान प्रतिशत पिछले चार चुनावों की तुलना में सबसे कम दर्ज किया गया। मतदान खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठने लगा कि आखिर इस बार मतदाता बूथों तक कम संख्या में क्यों पहुंचे। चुनावी आंकड़ों और स्थानीय परिस्थितियों पर नजर डालें तो इसके पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं।
पिछले चुनावों की तुलना में कम रहा मतदान
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार का मतदान प्रतिशत पिछले चार विधानसभा चुनावों और उपचुनावों की तुलना में सबसे कम रहा। चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मतदान में अपेक्षित उत्साह देखने को नहीं मिला और बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे।
आखिर क्यों कम हुई वोटिंग?
स्थानीय स्तर पर कई कारणों को मतदान प्रतिशत में गिरावट की वजह माना जा रहा है—
- बड़ी संख्या में मतदाता नौकरी, शिक्षा और व्यवसाय के कारण पटना से बाहर रहते हैं।
- मतदान के दिन कई लोग शहर से बाहर होने के कारण वोट नहीं डाल सके।
- लगातार बारिश और मौसम की स्थिति का भी असर मतदान पर पड़ा।
- शहरी क्षेत्रों में मतदान के प्रति अपेक्षाकृत कम रुचि भी एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।
- कुछ मतदान केंद्रों पर सुबह के समय धीमी मतदान प्रक्रिया के कारण भी शुरुआती रफ्तार कम रही।
शहरी सीट होने का भी पड़ा असर
बांकीपुर पटना का प्रमुख शहरी विधानसभा क्षेत्र है। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि महानगरों और शहरी क्षेत्रों में अक्सर ग्रामीण इलाकों की तुलना में मतदान प्रतिशत कम रहता है। बड़ी संख्या में नौकरीपेशा और छात्र वर्ग के लोग दूसरे शहरों में रहते हैं, जिससे मतदान का प्रतिशत प्रभावित होता है।
सभी दलों ने चलाया था जोरदार प्रचार
उपचुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जन सुराज सहित अन्य दलों ने लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया। कई वरिष्ठ नेताओं ने रोड शो, जनसभाएं और घर-घर संपर्क अभियान भी चलाए, लेकिन इसके बावजूद मतदान प्रतिशत उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सका।
चुनाव आयोग ने की थीं व्यापक तैयारियां
मतदान को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल, वेबकास्टिंग, फ्लाइंग स्क्वॉड और निगरानी टीमों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद कम मतदान ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
क्यों महत्वपूर्ण है कम मतदान
कम मतदान का असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ सकता है। जब मतदान प्रतिशत घटता है तो राजनीतिक दलों के पारंपरिक वोट बैंक की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि कम मतदान की स्थिति में संगठित वोट बैंक वाले दलों को अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिल सकता है, हालांकि अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
आगे क्या होगा?
अब सभी राजनीतिक दलों की नजर मतगणना पर है। मतदान प्रतिशत कम रहने के कारण चुनाव परिणाम को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक आकलन लगाए जा रहे हैं। अंतिम नतीजे आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कम मतदान का फायदा किस दल और उम्मीदवार को मिला।