पटना : बिहार के एक पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि वे पूजा-पाठ नहीं करते और उनके लिए माता-पिता ही ब्रह्मा और विष्णु हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है।
‘भगवान का नाम लेने से कुछ नहीं होता’
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि केवल भगवान का नाम लेने से कुछ नहीं होता। उनका मानना है कि व्यक्ति को अपने कर्म पर विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पारंपरिक पूजा-पाठ में विश्वास नहीं रखते और अपने जीवन में माता-पिता को सर्वोच्च स्थान देते हैं।
माता-पिता को बताया सबसे बड़ा सम्मान
उन्होंने कहा कि उनके लिए माता-पिता ही सबसे बड़े पूजनीय हैं। उनके अनुसार, माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। इसी सोच के कारण वे किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या पूजा-पाठ का पालन नहीं करते।
बयान पर शुरू हुई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ नेताओं ने इसे उनकी व्यक्तिगत सोच बताया, जबकि कुछ ने इस पर सवाल भी उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कई लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इस पर अपनी अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं।
बयान बना चर्चा का विषय
पूर्व मुख्यमंत्री का यह बयान बिहार की राजनीति के साथ-साथ सामाजिक और वैचारिक बहस का भी हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है।