नई दिल्ली: फारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कतर के प्रमुख ऊर्जा केंद्र रस लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला हुआ है, जिससे वैश्विक गैस आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। यह शहर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी (प्राकृतिक गैस) निर्यात केंद्रों में से एक है, जो हाल तक वैश्विक आपूर्ति का करीब 20% हिस्सा देता था।
कतर के अधिकारियों के अनुसार, बुधवार देर रात दागी गई पांच मिसाइलों में से चार को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, लेकिन एक मिसाइल रस लाफान क्षेत्र में गिर गई। हालांकि, हमले से पहले ही प्लांट को खाली करा लिया गया था, जिससे सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। कतर एनर्जी ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है।
⚠️ कतर का कड़ा रुख, ईरानी अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश
हमले को कतर के विदेश मंत्रालय ने “गंभीर उल्लंघन” और “खतरनाक बढ़ोतरी” करार दिया है। इसके जवाब में कतर ने ईरान के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया है।
🌍 पहले से बाधित थी सप्लाई, अब और बढ़ा संकट
इससे पहले ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद समुद्री मार्गों में बाधा आई थी, जिससे रस लाफान का वैश्विक संपर्क प्रभावित हुआ। इसी महीने ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रोकना पड़ा था और ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय एलएनजी बाजार में अस्थिरता बढ़ी।
🌐 एशिया-यूरोप पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का सबसे अधिक असर एशिया और यूरोप पर पड़ेगा, जो बिजली उत्पादन के लिए आयातित गैस पर निर्भर हैं। नए हमलों के बाद यह अनिश्चित हो गया है कि आपूर्ति कब तक सामान्य हो पाएगी।
🔥 अबू धाबी और सऊदी अरब भी सतर्क
एहतियात के तौर पर हबशान गैस प्लांट को भी बंद कर दिया गया है, जहां हमलों के मलबे से नुकसान हुआ। वहीं, सऊदी अरब ने अपने पूर्वी क्षेत्र में एक गैस सुविधा पर ड्रोन हमले को नाकाम करने का दावा किया है।
📈 कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 8% की तेजी आई और यह 111.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इससे पहले साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद भी बाजार में उथल-पुथल देखी गई थी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि रस लाफान जैसे बड़े हब पर हमला वैश्विक गैस बाजार के लिए बड़ा जोखिम है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि औद्योगिक परिसर का कौन-सा हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, लेकिन इसके असर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।