नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के बेड़े में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए की गर्जना जल्द सुनाई देगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) से तेजस के लिए चौथा इंजन प्राप्त हो गया है, जिससे विमान निर्माण में सबसे बड़ी रुकावट दूर हो गई है। इस उपलब्धि के साथ यह पक्का हो गया है कि नवंबर 2025 तक भारतीय वायुसेना को पहले दो उन्नत तेजस मार्क-1ए फाइटर जेट सौंप दिए जाएंगे।
इंजन की देरी से रुका था प्रोजेक्ट
फरवरी 2021 में सरकार ने 83 तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए एचएएल के साथ 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था। हालांकि, अमेरिकी इंजन की आपूर्ति में देरी के कारण अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिल सका था। अब इंजन की डिलीवरी शुरू होने से उम्मीद है कि 2028 तक सभी 83 विमान वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बन जाएंगे।
मिग-21 की जगह लेगा तेजस, बीकानेर में तैनाती
तेजस मार्क-1ए, 62 साल की शानदार सेवा के बाद 26 सितंबर 2025 को रिटायर हुए मिग-21 की जगह लेगा। वायुसेना की योजना के अनुसार, तेजस का पहला स्क्वाड्रन राजस्थान के बीकानेर स्थित नाल एयरबेस पर तैनात होगा, जो पाकिस्तान सीमा के पास भारत की हवाई ताकत को और मजबूत करेगा।
अधिक स्वदेशी और उन्नत है नया तेजस
तेजस मार्क-1ए अपने पिछले संस्करण से कहीं अधिक उन्नत है, जिसमें आधुनिक एवियॉनिक्स, रडार सिस्टम और 65% से अधिक स्वदेशी उपकरण शामिल हैं। यह सिंगल इंजन वाला हल्का लड़ाकू विमान हवा, जमीन और समुद्र में सटीक हमले करने में सक्षम है। इसमें दुश्मनों को चकमा देने के लिए ‘स्वयं रक्षा कवच’ जैसी अत्याधुनिक तकनीक भी है। हाल ही में 25 सितंबर 2025 को रक्षा मंत्रालय ने 97 अतिरिक्त तेजस विमानों के लिए एचएएल को ₹62,370 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट दिया है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिली नई उड़ान
यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए एक बड़ा कदम है। तेजस के शामिल होने से न केवल भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता भी नई ऊंचाइयों को छुएगी।