सृजन घोटाला: सेवानिवृत्त बीडीओ चंद्रशेखर झा की 100% पेंशन कटौती बरकरार

Srijan scam: 100% pension cut of retired BDO Chandrashekhar Jha remains intact

बिहार: सरकार ने सृजन घोटाला मामले में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त पीरपैंती बीडीओ चंद्रशेखर झा की शत-प्रतिशत पेंशन कटौती को बरकरार रखा है। यह कार्रवाई बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के तहत की गई है।

झा पर 4 करोड़ 52 लाख 88 हजार 246 रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी के आरोप हैं। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है और उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति भी मिल चुकी है।

अवैध निकासी और साजिश के आरोप
सूत्रों के अनुसार, झा के कार्यकाल में कार्यालय के विभिन्न मदों के बैंक खातों से बड़ी राशि की अवैध निकासी हुई। आरोप है कि उन्होंने न तो अनियमितता को रोका और न ही नियमानुसार कार्रवाई की। जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी धन को कथित षड्यंत्र और जालसाजी के तहत एक निजी समिति के खाते में स्थानांतरित किया गया।

इस संबंध में सीबीआई कांड संख्या आरसी 023 2018 50015 (16 अगस्त 2018) दर्ज है।

नियमों के तहत कार्रवाई
विभागीय स्तर पर झा से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने तर्क दिया कि नियम-43(बी) के बिना नियम-139 के तहत दंड नहीं दिया जा सकता और आरोप चार वर्ष से अधिक पुराने हैं। हालांकि विभागीय समीक्षा में पाया गया कि नियमावली में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

नियम-139(ग) के तहत राज्य सरकार को अधिकार है कि यदि सेवा अवधि में घोर कदाचार या पूर्णतः असंतोषजनक सेवा के पर्याप्त साक्ष्य हों, तो पेंशन की स्वीकृति की समीक्षा की जा सकती है। इस प्रक्रिया में झा को सुनवाई का अवसर भी दिया गया।

पूर्व में भी मिल चुका है दंड
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि झा को पूर्व में भी दंडित किया जा चुका है। राज्य खाद्य निगम, रोहतास में पदस्थापन के दौरान 2014-15 से जुड़े मामलों में उन्हें निंदन और वेतन में अवनति का दंड दिया गया था। सरकार का मानना है कि ये तथ्य उनकी सेवा अवधि में गंभीर कदाचार को दर्शाते हैं।

पुनर्विलोकन याचिका खारिज
झा ने पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में कहा था कि अभियोजन स्वीकृति के आधार पर पेंशन रोकना उचित नहीं है, क्योंकि मामला न्यायालय में लंबित है और दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

सरकार ने स्पष्ट किया कि अभियोजन स्वीकृति प्रथम दृष्टया दोष के संकेतों के आधार पर दी जाती है और सीबीआई की जांच रिपोर्ट, साक्ष्य एवं गवाहों के बयान मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं।

किसी नए तथ्य या साक्ष्य के अभाव में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन अस्वीकार कर दिया गया। राज्यपाल के आदेश से जारी संकल्प में 100 प्रतिशत पेंशन कटौती का दंड पूर्ववत रखने का निर्णय लिया गया है, जिसका प्रकाशन बिहार राजपत्र में किया जाएगा।

कड़ा संदेश
इस फैसले से स्पष्ट संकेत गया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और घोर कदाचार पर राज्य सरकार सख्त है। अधिकारी चाहे सेवा में हों या सेवानिवृत्त, पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह निर्णय प्रशासनिक और वित्तीय अनुशासन के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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