सुकमा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों की सख्त कार्रवाई और सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीतियों का बड़ा परिणाम सामने आया है। सुकमा जिले में सोमवार को पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई के बीच कुल 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इनमें 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में 9 नक्सली इनामी थे, जिन पर मिलाकर 48 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि इन नक्सलियों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की खतरनाक ‘बटालियन नंबर-1’ के सदस्य भी शामिल हैं।
एसपी चव्हाण के अनुसार, सरेंडर करने वाले हार्डकोर नक्सलियों में माडवी सन्ना, उसकी पत्नी सोडी हिडमे, सूर्यम उर्फ रव्वा सोमा, और उसकी पत्नी मीना उर्फ माडवी भीमे शामिल हैं। इन चारों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा दो एरिया कमेटी मेंबर भी हैं, जिन पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। एक माओवादी पर 3 लाख रुपये, जबकि बाकी पर 1 से 2 लाख रुपये का इनाम था।
अधिकारियों के अनुसार, ये सभी कैडर माओवादी विचारधारा और लगातार जारी हिंसा से परेशान थे। राज्य सरकार की विकासपरक योजना ‘नियाद नेल्लनार’ (आपका अच्छा गांव) और पुलिस की पुनर्वास पहल ‘पूना मरघम’ (सामाजिक एकीकरण) से प्रभावित होकर उन्होंने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया।
पुलिस ने सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि के तौर पर 50,000 रुपये नकद प्रदान किए हैं और सरकार की नीति के तहत इनके पूर्ण पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 23 महीनों में 2,150 से अधिक नक्सली, जिनमें कई शीर्ष कमांडर भी शामिल हैं, हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।