पुलिस एक्ट 1861 की दमन नीति का नुकसान सबसे ज्यादा *आम जनता और पुलिस खुद दोनों का हुआ है।
1. आम जनता का नुकसान
– डर का माहौल: एक्ट “कानून व्यवस्था बनाए रखने” के लिए नहीं, “ब्रिटिश राज को बचाने” के लिए बना था। आज भी पुलिस को जनता का मित्र नहीं, मालिक समझा जाता है।
– जवाबदेही नहीं: जनता शिकायत करे तो सुनवाई कम। थाने में FIR लिखवाने से लेकर केस तक में आम आदमी परेशान होता है।
– भेदभाव: दबंग, पैसे वाले और नेता के कहने पर कार्रवाई। गरीब की आवाज दब जाती है।
2. पुलिस कर्मियों का नुकसान
– गुलाम वाली मानसिकता: ऊपर से आदेश आया तो करना ही है। गलत भी हो तो सवाल नहीं पूछ सकते।
– मानवाधिकार नहीं: 12-16 घंटे ड्यूटी, छुट्टी नहीं, बैठने की कुर्सी नहीं, पीने का पानी नहीं। इन्हें भी “सिपाही” समझा जाता है, इंसान नहीं।
– जनता से दूरी: वर्दी के कारण पुलिस और जनता के बीच भरोसे की जगह डर आ गया।
3. लोकतंत्र और सरकार का नुकसान
– 1861 का एक्ट, 2026 का भारत: 165 साल पुराना कानून आज के लोकतंत्र, संविधान और मानवाधिकार से मेल नहीं खाता।
– पुलिस सुधार रुके: सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में प्रकाश सिंह केस में सुधार बोले थे, पर ज्यादातर राज्य ने लागू नहीं किया।
– अपराध पर असर: जब पुलिस खुद सुविधाहीन और दबाव में होगी तो अपराध पर नियंत्रण कैसे होगा?
सीधी बात :
अंग्रेजों ने ये एक्ट “शासन चलाने” के लिए बनाया था। आजादी के बाद हमें इसे “सेवा करने” वाला एक्ट बनाना चाहिए था, पर नहीं बना।