पटना: भारत-नेपाल की संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बढ़ती अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए बिहार पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और मानव तस्करी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से चार नई स्पेशल यूनिट का गठन किया गया है। इसे सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
संयुक्त ऑपरेशन से होगी त्वरित कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अधिकारियों ने बताया कि इन यूनिट्स में स्पेशल टास्क फोर्स बिहार (STF), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और विशेष शाखा के अनुभवी अधिकारियों व जवानों को शामिल किया गया है। इन टीमों की सबसे बड़ी ताकत संयुक्त ऑपरेशन होगी, जिसके तहत खुफिया सूचनाओं के आधार पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
तस्करी और जाली नोट नेटवर्क पर फोकस
नई यूनिट्स का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से संचालित जाली नोटों के गिरोह को ध्वस्त करना, मादक पदार्थों की तस्करी रोकना और मानव तस्करी जैसे अपराधों को जड़ से खत्म करना है। सीमांचल क्षेत्र में इनकी तैनाती से अपराधियों पर सीधा दबाव बनेगा और अवैध नेटवर्क कमजोर होंगे।
आंकड़ों में सख्त कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अब तक एजेंसियों ने 128 मामलों में कार्रवाई करते हुए 146 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। नशे के खिलाफ अभियान में 6000 किलो से अधिक मादक पदार्थों की बरामदगी बड़ी सफलता मानी जा रही है। इसके साथ ही पशु तस्करी के खिलाफ भी जिला पुलिस के साथ मिलकर अभियान चलाया जा रहा है।
हॉटस्पॉट इलाकों पर विशेष निगरानी
पुलिस रणनीति के तहत सीमा के उन संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां से अवैध गतिविधियां सबसे ज्यादा संचालित होती हैं। इन इलाकों में निगरानी बढ़ाकर तस्करी के नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही तोड़ने की योजना है।
ड्रग्स के खिलाफ अलग सेल
युवाओं को नशे से बचाने के लिए STF के भीतर एक विशेष सेल का गठन किया गया है, जो ड्रग पेडलर्स और उनके नेटवर्क पर फोकस कर रही है। खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार छापेमारी और कार्रवाई जारी है।
सीमांचल में मजबूत होगा सुरक्षा कवच
चार नई यूनिट्स के गठन से सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है। बिहार पुलिस का मानना है कि इस संयुक्त पहल से न सिर्फ अपराध पर लगाम लगेगी, बल्कि स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ेगा।