मुंबई: मुंबई के एक अस्पताल में 53 वर्षीय व्यक्ति ने गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के कारण अपनी जान गंवा दी। यह इस तंत्रिका विकार के कारण मुंबई में हुई पहली मौत है। अधिकारियों के मुताबिक, वडाला इलाके का निवासी और एक अस्पताल में ‘वार्ड बॉय’ के रूप में काम करने वाला मरीज लगभग 15 दिन पहले पुणे गया था, जहां जीबीएस का प्रकोप देखा गया था। उसे 23 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत गंभीर हो गई और अंततः उसकी मौत हो गई। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आयुक्त और प्रशासक भूषण गगरानी ने इस बात की पुष्टि की कि यह जीबीएस के कारण मुंबई में पहली मौत है।
अधिकारियों ने पहले कहा था कि मुंबई में जीबीएस का पहला मामला 7 फरवरी को सामने आया था, जब अंधेरी (पूर्व) की 64 वर्षीय महिला जीबीएस से पीड़ित पाई गई थी।
जीबीएस क्या है? गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) एक दुर्लभ तंत्रिका विकार है, जिसमें व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर के तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है। इससे शरीर के हिस्से अचानक सुन्न पड़ सकते हैं, मांसपेशियों में कमजोरी आ सकती है और कुछ मामलों में निगलने या सांस लेने में भी दिक्कत होती है।
पुणे में जीबीएस के मामले बढ़े महाराष्ट्र के पुणे में अब तक पांच और लोगों में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) की पुष्टि हुई है। इसके बाद इस बीमारी के संदिग्ध और पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 197 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इन पांच नए मरीजों में से दो नए मामले हैं, जबकि तीन पहले के मरीजों के हैं।
197 मामले सामने आए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार, अब तक 197 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 172 में जीबीएस की पुष्टि हुई है। इनमें से 40 मरीज पुणे नगर निगम (पीएमसी) क्षेत्र से हैं, 92 नए शामिल गांवों से, 29 पिंपरी चिंचवड़ नगर निगम क्षेत्र से, 28 पुणे ग्रामीण क्षेत्र से और आठ अन्य जिलों से हैं। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि 104 मरीजों को उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 50 मरीज गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में और 20 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। जीबीएस के कारण पुणे में अब तक सात मरीजों की मौत हो चुकी है।