बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार शाम पटना समाहरणालय सभागार में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में विभाग के सभी वरीय अधिकारी, भूमि सुधार उपसमाहर्ता, अंचल अधिकारी एवं राजस्व कर्मी शामिल हुए। बैठक में प्रधान सचिव सीके अनिल, सचिव जय सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 94 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत हैं, राज्य की 76 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और करीब 68 प्रतिशत अपराध भूमि विवाद से जुड़े हैं। ऐसे में भूमि संबंधी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भूमि सुधार जनकल्याण संवाद में बड़ी संख्या में लोग विभागीय खामियों से परेशान होकर पहुंचे हैं, अब इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे करने होंगे।
अंचल अधिकारियों पर नाराजगी, स्पष्टीकरण तलब
उपमुख्यमंत्री ने दाखिल–खारिज एवं परिमार्जन मामलों में अनावश्यक देरी, बेवजह रिजेक्शन और फाइलों के ट्रांसफर की प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताया। विशेष रूप से दीदारगंज, संपतचक, बिहटा और दानापुर के अंचलाधिकारियों के यहां मामलों के अत्यधिक लंबित रहने पर नाराजगी जाहिर करते हुए उनसे स्पष्टीकरण पूछने के निर्देश दिए। साथ ही सभी भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं को अपने-अपने प्रखंडों की नियमित मॉनिटरिंग, पंचायत स्तर पर निरीक्षण और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया गया।
फर्जीवाड़े पर सख्ती, बनेगी स्पेशल टीम
बैठक में उपमुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि फर्जी कागजात के आधार पर मामलों को लटकाने या गलत दाखिल–खारिज करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों की जांच के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेष टीम गठित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि गलती पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि 31 दिसंबर तक सभी सही लंबित मामलों का हर हाल में निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। जनवरी में पंचायतवार दोबारा समीक्षा की जाएगी। प्रधान सचिव सीके अनिल ने अनावश्यक रिजेक्शन और पेंडेंसी कम करने पर जोर दिया।
उपमुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकारी अधिकारी रहते हुए सरकारी जमीन का गलत दाखिल–खारिज करना अमानत में खयानत है। ऐसी गलती को सुधारना संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होगी और दूसरी बार मौका नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने पटना को मॉडल रेवेन्यू डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित करने, दलालों के हस्तक्षेप से मुक्त होकर समयबद्ध कार्य निष्पादन करने की भी सलाह दी। सचिव जय सिंह ने कहा कि जनता के कार्यों को सरल बनाने की पहल तभी सफल होगी, जब फील्ड स्तर पर अधिकारी संवेदनशीलता और दक्षता के साथ काम करेंगे।
पटना के जिलाधिकारी एस. त्यागरजन ने दाखिल–खारिज मामलों में बेवजह आपत्ति लगाने की प्रवृत्ति खत्म करने की जरूरत बताई। उन्होंने ई-मापी पोर्टल पर मापी प्रतिवेदन अपलोड में हो रही लापरवाही पर चिंता जताते हुए सभी अंचलाधिकारियों को अपने अधीनस्थ कर्मियों की नियमित मॉनिटरिंग और कार्य व्यवहार में सुधार के निर्देश दिए।
बैठक में विशेष सचिव अरुण कुमार सिंह, सचिव सह चकबंदी निदेशक राकेश कुमार, ओएसडी चंद्रिमा अत्री, भू-अर्जन निदेशालय के निदेशक कमलेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक सह संयुक्त सचिव आजीव वत्सराज, उप निदेशक मोना झा, ओएसडी मणिभूषण किशोर, उप सचिव डॉ. सुनील कुमार, उप सचिव सुनील कुमार सिंह, ओएसडी अनुपम प्रकाश, आईटी मैनेजर आनंद शंकर समेत कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।