नई दिल्ली: भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी अड्डों को ध्वस्त करने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इसी बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जो रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस मुलाकात से ठीक पहले, पाकिस्तान ने भारत के 15 सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसे भारत ने S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मदद से नाकाम कर दिया। इसके जवाब में भारत ने इजरायली मेड HAROP आत्मघाती ड्रोन से पाकिस्तान के कई रक्षा सिस्टम तबाह कर दिए।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी को चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर काम करने का व्यापक अनुभव है। 15 दिसंबर 1984 को सेना की जम्मू और कश्मीर राइफल्स यूनिट में कमीशन पाने वाले जनरल द्विवेदी ने 40 वर्षों की सेवा में विभिन्न उच्च पदों पर कार्य किया है। वे नेशनल डिफेंस कॉलेज, यूएस आर्मी वॉर कॉलेज, वेलिंगटन डिफेंस स्टाफ कॉलेज, और आर्मी वॉर कॉलेज, महू जैसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से प्रशिक्षित हैं। उनके पास रक्षा, प्रबंधन और सामरिक अध्ययन में तीन उच्च शैक्षणिक डिग्रियां भी हैं।
इसी बीच, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के आतंकवाद से गहरे संबंधों को बेनकाब किया। उन्होंने लश्कर कमांडर अब्दुल रऊफ की पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के साथ तस्वीरें जारी कीं और बताया कि पाकिस्तान आतंकियों को राजकीय सम्मान देता है। साथ ही, उन्होंने पुंछ में सिख समुदाय पर हमले का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया।
इन तमाम घटनाक्रमों के बीच अब पूरी दुनिया की नजर भारत की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी है, और यह साफ है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं है।