नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत हटाए गए नामों की सूची अब सभी जिला मजिस्ट्रेटों की वेबसाइटों पर उपलब्ध करा दी गई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया था कि मतदाता सूची से हटाए गए करीब 65 लाख नामों का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत में संसद और विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया बहु-स्तरीय और विकेंद्रीकृत व्यवस्था पर आधारित है। मतदाता सूची को तैयार करने की जिम्मेदारी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ईआरओ) और बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की होती है, जो एसडीएम स्तर के अधिकारी होते हैं। सूची की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना इन्हीं अधिकारियों का कर्तव्य होता है।
उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची 1 अगस्त को प्रकाशित की गई, जिसकी डिजिटल और प्रिंट कॉपियां सभी राजनीतिक दलों को दी गई हैं और इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है ताकि आम नागरिक भी इसमें भागीदारी कर सकें।
दावे और आपत्तियों का मौका 1 सितंबर तक
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि 1 सितंबर तक नागरिक और राजनीतिक दल सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इस प्रक्रिया से अंतिम मतदाता सूची को त्रुटिरहित और निष्पक्ष बनाने में सहायता मिलती है।
भ्रामक प्रचार से बचने की अपील
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने दोहराया कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से स्वीकृत और पारदर्शी है। साथ ही नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेने की अपील की।