बिहार: राज्य सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (बिस्कोमान) के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए हुए चुनाव के बाद अब मतगणना को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। शुक्रवार को पटना स्थित कलेक्ट्रेट भवन में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ, लेकिन झारखंड हाई कोर्ट के एक आदेश ने मतगणना पर रोक की संभावना खड़ी कर दी है।
पटना के जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि मतगणना कराई जाए या कोर्ट के आदेश के आलोक में इसे रोका जाए। आरजेडी के एमएलसी डॉ. सुनील सिंह के वकील ने दावा किया है कि हाई कोर्ट ने बिस्कोमान की चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया है। वहीं, उनका आरोप है कि बीजेपी नेता विशाल सिंह का गुट प्रशासन पर मतगणना कराने का दबाव बना रहा है।
अध्यक्ष पद के लिए आरजेडी समर्थित वंदना सिंह और बीजेपी समर्थक विशाल सिंह के बीच सीधी टक्कर है। वंदना सिंह, आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह की पत्नी हैं और उनके समर्थन में पार्टी का बड़ा वर्ग सक्रिय है। उपाध्यक्ष पद पर सुनील सिंह गुट से विनय कुमार और विशाल सिंह गुट से महेश राय आमने-सामने हैं। दोनों पक्षों ने जीत के लिए हर संभव रणनीति अपनाई।
इस चुनाव में कुल 20 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मतदान किया। चुनाव प्रक्रिया को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सूत्रों का कहना है कि विशाल सिंह के पक्ष में अधिक समर्थन देखा गया, जिससे उनकी जीत की संभावना जताई जा रही है। हालांकि कोर्ट के आदेश के कारण तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।
बिस्कोमान जैसे महत्वपूर्ण सहकारी संस्थान के चुनाव में न्यायिक दखल और प्रशासनिक असमंजस ने पूरे माहौल को संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक खींचतान और कानूनी उलझनों के बीच लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह के फैसले पर टिकी हैं। अगर मतगणना की अनुमति मिलती है तो नई कार्यकारिणी का गठन जल्द होगा, अन्यथा मामला कोर्ट की लंबी प्रक्रिया में उलझ सकता है।