काठमांडू: नेपाल में हाल के दिनों में भड़की हिंसा और Gen-Z के उग्र प्रदर्शनों ने एक बार फिर गुरु गोरखनाथ की 18वीं शताब्दी की भविष्यवाणी को सुर्खियों में ला दिया है। सड़कों पर गूंज रहे ‘राजा आउनुपर्छ’ (राजा वापस आना चाहिए) के नारे और राजशाही की बहाली की मांग ने देश में राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी है। कई लोग इसे गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद से जोड़कर देख रहे हैं, जिन्होंने राजा पृथ्वी नारायण शाह को कहा था कि उनका शाह वंश 11 पीढ़ियों तक नेपाल पर राज करेगा।
गुरु गोरखनाथ की भविष्यवाणी
गुरु गोरखनाथ, नाथ संप्रदाय के महान योगी और सिद्ध पुरुष, जिन्हें कुछ लोग 8वीं और कुछ 11वीं शताब्दी का मानते हैं, का नेपाल के इतिहास और संस्कृति में गहरा प्रभाव रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने 18वीं शताब्दी में राजा पृथ्वी नारायण शाह को आशीर्वाद दिया था कि उनके वंश की 11 पीढ़ियां नेपाल पर राज करेंगी। कुछ राजशाही समर्थकों का मानना है कि यह भविष्यवाणी 2001 के राजमहल हत्याकांड के साथ पूरी हो गई, जब राजा दीपेंद्र शाह कोमा में सिंहासन पर बैठे, जिन्हें 11वीं पीढ़ी माना गया। इसके बाद 2008 में नेपाल में क्रांति के बाद राजशाही का अंत हुआ और लोकतंत्र स्थापित हुआ। हालांकि, कुछ लोग मानते हैं कि शाह वंश की एक और पीढ़ी अभी नेपाल पर राज करेगी।
हिंसा और Gen-Z का आंदोलन
नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में Gen-Z के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ था, लेकिन अब यह राजशाही की बहाली की मांग में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, पूर्व प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपति के आवासों पर हमले किए, जिसके चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को इस्तीफा देना पड़ा। इस हिंसा में अब तक 22 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं।
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की स्थिति
इन प्रदर्शनों के बीच पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह का नाम फिर से चर्चा में है। 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद से वह काठमांडू के निर्मल निवास और कभी-कभी नागर्जुन हिल्स के अपने कॉटेज में आम नागरिक की तरह रह रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि वह सत्ता संभालें, लेकिन ज्ञानेंद्र ने अभी तक सत्ता में वापसी की कोई औपचारिक इच्छा जाहिर नहीं की है। हाल ही में सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए उनकी सुरक्षा कम कर दी और 7,93,000 नेपाली रुपये का जुर्माना भी लगाया।
कौन थे गुरु गोरखनाथ?
गुरु गोरखनाथ नाथ संप्रदाय के महान योगी थे, जिन्हें नेपाल और भारत के पूर्वांचल में लाखों लोग पूजते हैं। कुछ लोग उन्हें भगवान शिव का अवतार मानते हैं। कहा जाता है कि उनका जन्म मां के गर्भ से नहीं, बल्कि गोबर के गड्ढे में हुआ था, इसलिए उन्हें गोरक्ष भी कहा जाता है। उन्होंने हठ योग की परंपरा को बढ़ावा दिया और नेपाल के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्या लौटेगी राजशाही?
नेपाल में 2008 में गणतंत्र की स्थापना के बाद से 17 सालों में 14 सरकारें बदल चुकी हैं, जिससे जनता में लोकतंत्र के प्रति मोहभंग हुआ है। राजशाही समर्थकों का तर्क है कि 1991 का संविधान, जिसमें संवैधानिक राजशाही और बहुदलीय लोकतंत्र की व्यवस्था थी, फिर से लागू होना चाहिए। कुछ लोग इसे गुरु गोरखनाथ की भविष्यवाणी का संकेत मानते हैं कि शाह वंश की एक और पीढ़ी राज करेगी।
हालांकि, सरकार और नेपाली कांग्रेस का कहना है कि राजशाही की बहाली संभव नहीं है। फिर भी, हिंदू राष्ट्र की मांग और राजशाही समर्थकों के हिंसक प्रदर्शनों ने नेपाल में राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया है।