यरूशलेम: मिस्र में हुए ऐतिहासिक गाजा शांति समझौते की स्याही सूख भी नहीं पाई थी कि आतंकी संगठन हमास ने उसकी खुलेआम धज्जियां उड़ा दीं। शांति समझौते के तहत संघर्षविराम और हमास के हथियार डालने की शर्त पर बनी सहमति के बावजूद, गाजा से सामने आया एक रौंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो पूरी दुनिया को झकझोर रहा है।
इस सोमवार शाम के वीडियो में हमास के लड़ाके 8 लोगों को इजरायली जासूस बताकर उनके हाथ-पैर बांधते हैं, आंखों पर पट्टी लगाते हैं और सड़क पर घुटनों के बल बैठाकर सिर में गोली मारकर उनकी बेरहमी से हत्या कर देते हैं। यह पूरा दृश्य भीड़ के ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारों के बीच अंजाम दिया गया। वीडियो में हमास के कमांडर हरे रंग के स्कार्फ में दिख रहे हैं, जो संगठन की पहचान माना जाता है।
ISIS की क्रूरता की याद
वीडियो की निर्ममता और शैली आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) की क्रूर कार्रवाइयों की याद दिला रही है। जिस तरह से सार्वजनिक रूप से इन लोगों की हत्या की गई, उसने पूरे शांति प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समझौते का खुला उल्लंघन
यह घटना उस शांति समझौते का सीधा उल्लंघन है, जो अमेरिका, मिस्र, तुर्की और कतर की मध्यस्थता से हुआ था और जिसे इजरायल ने भी स्वीकार किया था। समझौते की सबसे अहम शर्त थी कि हमास पूरी तरह से हथियार डालेगा और गाजा में शांति कायम करेगा। लेकिन ताजा घटना से साफ है कि हमास न सिर्फ हथियार डालने को तैयार नहीं, बल्कि अपने वर्चस्व को और मजबूत करने में जुटा है।
हमास ने दी सफाई, पर नहीं दिए सबूत
हमास ने एक बयान जारी कर कहा है कि मारे गए लोग “अपराधी” और इजरायल के लिए काम करने वाले “सहयोगी” थे। हालांकि संगठन ने अपने इस दावे के पक्ष में कोई सबूत नहीं पेश किया। जानकारों का कहना है कि यह कार्रवाई शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारने की सुनियोजित कोशिश है।
इजरायल के लिए बढ़ी चिंता
इजरायल पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि संघर्षविराम के लिए हमास को या तो हथियार डालने होंगे या गाजा छोड़ना होगा। लेकिन मौजूदा हालात से लगता है कि हमास न तो हथियार छोड़ने के लिए तैयार है, न गाजा छोड़ने को। इससे इजरायल के सामने एक बार फिर सुरक्षा और रणनीति को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
निष्कर्ष
गाजा में हुआ यह ताजा नरसंहार मध्यस्थ देशों की कोशिशों पर पानी फेरने जैसा है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति बहाल करने की कोशिश कर रहा है, वहीं हमास की यह कार्रवाई किसी नई हिंसक लहर की चेतावनी हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इजरायल फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनता है या अंतरराष्ट्रीय दबाव से हालात को संभालने की कोशिश करता है।