Shoaib Akhtar Doping Case: ‘हकीम की दवा’ बताकर बचने की कोशिश करते रहे शोएब अख्तर, डोप टेस्ट रिपोर्ट ने खोली सच्चाई

Shoaib Akhtar Doping Case: Shoaib Akhtar tried to evade blame by claiming it was 'herbal medicine' (Hakim's remedy), but the dope test report revealed the truth

नई दिल्ली: साल 2006 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम बड़े विवाद में घिर गई थी। टीम के दो प्रमुख तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने दोनों खिलाड़ियों को तत्काल प्रभाव से टीम से बाहर कर भारत से वापस पाकिस्तान भेज दिया।

डोप टेस्ट में प्रतिबंधित स्टेरॉयड की हुई पुष्टि

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टीम के खिलाड़ियों का आंतरिक डोप टेस्ट कराया था। इन सैंपलों की जांच वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) से मान्यता प्राप्त लैब में हुई, जहां शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ के नमूनों में प्रतिबंधित स्टेरॉयड नैंड्रोलोन (Nandrolone) पाए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों को चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर कर दिया गया।

शोएब ने खुद को बताया बेगुनाह

डोपिंग विवाद सामने आने के बाद शोएब अख्तर ने खुद को बेगुनाह बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर कोई प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवा नहीं ली। शोएब का दावा था कि वह एक हकीम द्वारा दी गई दवा का सेवन कर रहे थे और उन्होंने कभी खेल के साथ धोखा नहीं किया।

जांच में दावों का नहीं मिला समर्थन

जांच समिति के सामने शोएब अख्तर अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। जांच अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन वे यह साबित नहीं कर पाए कि प्रतिबंधित पदार्थ उनके शरीर में कैसे पहुंचा। समिति ने डोप टेस्ट की प्रक्रिया और लैब रिपोर्ट को सही माना।

दोबारा टेस्ट का मौका भी ठुकराया

रिपोर्ट के अनुसार, शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ को दोबारा टेस्ट कराने का अवसर भी दिया गया था, लेकिन दोनों खिलाड़ियों ने इस विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने डोपिंग मामले में आगे की कार्रवाई की।

क्रिकेट जगत में लंबे समय तक रही चर्चा

यह मामला उस समय क्रिकेट जगत के सबसे चर्चित विवादों में शामिल रहा। चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट से ठीक पहले पाकिस्तान के दो प्रमुख गेंदबाजों का बाहर होना टीम के लिए बड़ा झटका माना गया था। इस घटना ने क्रिकेट में डोपिंग को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी थी।

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