नई दिल्ली: वक्फ संशोधन कानून 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन की सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी सामने आई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों के दौरान कहा – “इस्लाम तो इस्लाम ही रहेगा चाहे कोई कहीं भी रहे।” केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ करने वाले व्यक्ति का प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होना जरूरी है, और यह शरिया कानून के अनुरूप है। उन्होंने कहा…
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