नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र में Iran के राजदूत Amir Saeid Iravani ने दावा किया है कि अमेरिका और Israel के हवाई हमलों में अब तक महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 1332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। वहीं ईरान भी लगातार जवाबी हमले कर रहा है, जिससे हालात और गंभीर होते जा रहे हैं।
इस बीच United States ने संकेत दिया है कि आने वाली रात में ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। मौजूदा हालात में पूरी दुनिया की नजर इस टकराव पर टिकी हुई है और हर नए बयान के साथ तनाव और बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने भी संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज की जा सकती है। Kudlow कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान शुरू कर सकता है। उनके अनुसार इस अभियान में खास तौर पर ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाया जाएगा।
बेसेंट ने कहा कि रक्षा सचिव Pete Hegseth, जनरल केन और राष्ट्रपति पहले ही इस दिशा में स्पष्ट संकेत दे चुके हैं। उनका दावा है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमताएं तेजी से कमजोर हो रही हैं और अब तक का अभियान प्रभावी साबित हुआ है।
उधर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने वैश्विक तेल बाजार को लेकर भी अहम कदम उठाया है। वॉशिंगटन ने India को समुद्र में फंसे Russia के कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी है। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि भविष्य में रूसी तेल पर लगे कुछ और प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि समुद्र में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित कच्चा तेल फंसा हुआ है और यदि इन पर से रोक हटती है तो बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।