नई दिल्ली: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इस शनिवार को 8वीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट को लेकर देशभर में तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संकेत दिया कि इस बार का बजट खासतौर पर गरीबों, मध्यम वर्ग और महिलाओं के लिए नई पहल लेकर आ सकता है।
क्या बोले PM मोदी?
संसद के बजट सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आगामी बजट में महिलाओं के लिए समान अधिकार, गरिमा और सम्मान को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के लिए सम्मानपूर्ण जीवन सुनिश्चित करने और उन्हें समान अधिकार देने की दिशा में कदम उठाए जाने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस सत्र में खासतौर पर नारी शक्ति के गौरव को पुनः स्थापित करना और महिलाओं को पंथ, संप्रदाय के भेद से मुक्त होकर समान अधिकार प्रदान करना, इस दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।” उन्होंने इस लक्ष्य को सत्तारूढ़ भाजपा के कल्याणकारी उपायों का केंद्र बताते हुए महिलाओं के लिए समान अधिकार की अहमियत पर जोर दिया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में क्या था?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संयुक्त सत्र में अपने अभिभाषण के दौरान गरीबों, मध्यम वर्ग, युवाओं, महिलाओं और किसानों के प्रति केंद्र सरकार के समर्पण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “आज, राष्ट्र गरीबों, मध्यम वर्ग, युवाओं, महिलाओं और किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए असाधारण गति से लागू किए जा रहे प्रमुख निर्णयों और नीतियों का गवाह बन रहा है।”
आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट
संसद में शुक्रवार को पेश की गई आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की भविष्यवाणी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, और इसे संतुलित राजकोषीय सशक्तीकरण और स्थिर उपभोग का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक और विवेकपूर्ण नीति प्रबंधन की आवश्यकता होगी, और मुद्रास्फीति का जोखिम बना रहेगा।
इस बार का बजट न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह सामाजिक समावेशन, महिलाओं की स्थिति और देश के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए नई दिशा भी प्रदान कर सकता है।