नई दिल्ली: आज के दौर में सेविंग अकाउंट सबसे आम बैंक अकाउंट बन चुका है। हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सैलरी इसी अकाउंट में आती है और अधिकतर लोग डिपॉजिट व ट्रांजैक्शन के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इस खाते में जमा राशि पर ब्याज (Interest) भी मिलता है, जिसे आय में जोड़ना जरूरी होता है।
सेविंग अकाउंट में कितनी राशि रख सकते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, सेविंग अकाउंट में 10 लाख रुपये तक का कैश रखना सामान्य सीमा मानी जाती है। अगर इससे अधिक राशि खाते में रखी जाती है, तो उस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। इसलिए जितनी भी राशि खाते में जमा हो, उसका स्रोत स्पष्ट और दस्तावेज़ों से प्रमाणित होना चाहिए।
ब्याज की जानकारी देना जरूरी
आपको हर साल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को यह जानकारी देना अनिवार्य है कि आपने सेविंग अकाउंट से कितना ब्याज अर्जित किया। यह ब्याज आपकी कुल आय में शामिल किया जाता है। जानकारी नहीं देने पर आईटी विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर नजर
यदि आप एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च तक) में अपने सेविंग अकाउंट में 10 लाख रुपये से अधिक की जमा करते हैं, तो इसे हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में बैंक को इनकम टैक्स एक्ट 1962 की धारा 114B के तहत सूचना देनी होती है।
- अगर आप एक दिन में ₹50,000 से ज्यादा की नकद जमा या निकासी करते हैं, तो पैन नंबर देना अनिवार्य है।
- पैन न होने पर आपको फॉर्म 60 या 61 भरकर देना होगा।
फंड के स्रोत का प्रमाण रखें तैयार
अगर आपने 10 लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा की है, तो आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आ सकता है। इस पर जवाब देने के लिए आपके पास अपने फंड के स्रोत का प्रमाण होना चाहिए, जैसे:
- बैंक स्टेटमेंट
- इन्वेस्टमेंट डॉक्यूमेंट
- संपत्ति या विरासत से जुड़े कागजात
निष्कर्ष:
सेविंग अकाउंट को सामान्य समझना भूल हो सकती है। आपकी एक चूक आयकर विभाग की जांच की वजह बन सकती है। इसलिए सभी लेनदेन का रिकॉर्ड रखें और टैक्स नियमों का पालन करें।