जाति आधारित जनगणना पर शुरू हुई सियासी जंग, सभी दल क्रेडिट लेने की होड़ में

Political war started on caste based census, all parties are in competition to take credit

पटना: केंद्र सरकार ने पूरे देश में जाति आधारित जनगणना कराने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद बिहार में सियासी तापमान चढ़ गया है। सभी दल इसे अपनी-अपनी विचारधारा और नेता की जीत बताने में जुट गए हैं।

आरजेडी और कांग्रेस ने बताया अपनी जीत
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस फैसले को लालू प्रसाद यादव की वर्षों की लड़ाई की जीत बताया। उन्होंने कहा कि “लालू जी ने सड़क से लेकर संसद तक जाति जनगणना की मांग को लगातार उठाया। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद राज्य स्तर पर जातीय गणना कराई गई। अब वही लड़ाई देशभर में रंग लाई है।”

वहीं, कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की जीत बताते हुए दावा किया कि कांग्रेस की पहल और निरंतर दबाव के कारण ही केंद्र सरकार यह फैसला लेने पर मजबूर हुई है।

सत्ताधारी एनडीए ने लिया श्रेय
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने बयान दिया कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालू यादव के अरमान पूरे किए।” इस पर पलटवार करते हुए तेजस्वी ने तंज कसा, “क्या इसका मतलब यह है कि बीजेपी आज हमारे एजेंडे पर चल रही है?”

बीजेपी ने यह भी दावा किया कि इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता है। उनका कहना है कि इससे समाज के सभी वर्गों को न्याय मिलने का रास्ता खुलेगा।

तेजस्वी यादव का हमला – 65% आरक्षण पर चुप्पी क्यों?
तेजस्वी यादव ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा, “बिहार सरकार ने जातीय गणना के आधार पर राज्य में 65 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया। अगर यह सही में सामाजिक न्याय की सोच है, तो अब तक ये कदम क्यों नहीं उठाया गया?”

2021 से 2025 तक लेट – सवालों के घेरे में केंद्र
जाति जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन अब 2025 में कराने की बात हो रही है। तेजस्वी यादव ने इसे “चार साल की देरी और राजनीतिक मजबूरी” बताया और कहा कि यह फैसला भी हमारी विचारधारा की जीत है, जिसे हमने संघर्ष करके हासिल किया है।

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