बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पाटलिपुत्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, पटना के विकास पदाधिकारी भवेश कुमार सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, भवेश कुमार सिंह पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से आय से 60.68% अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
प्रारंभिक जांच और सूचना के सत्यापन के बाद आर्थिक अपराध थाना ने कांड संख्या-43/2025 (दिनांक 11.12.2025) के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया। इसके पश्चात न्यायालय से तलाशी अधिपत्र प्राप्त कर 12.12.2025 की सुबह से छापेमारी की कार्रवाई शुरू की गई।
छापेमारी की शुरुआत पटना स्थित उनके किराए के आवास फ्लैट नं. 203, पुष्पक रेसिडेंसी, रामजयपाल नगर से हुई। इसके बाद टीम ने उनके पैतृक घर—जकरियापुर, थाना माझागढ़, जिला गोपालगंज, भावना पेट्रोलियम विशम्भरपुर कार्यालय, जय माता दी राइस मिल, बेला बिहटा, और पाटलिपुत्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, एस.पी. वर्मा रोड स्थित कार्यालय पर भी तलाशी ली।
EOU अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान बैंक और अन्य परिसरों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संभावित साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इनकी जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामलों पर सख्त रुख का हिस्सा है।
भवेश कुमार सिंह के विरुद्ध मामला तब सामने आया जब उनकी घोषित आय और वास्तविक संपत्ति के बीच भारी असंगति पाई गई। ऐसे मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई में EOU की भूमिका अहम मानी जाती है।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल संपत्ति की जांच करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए एक कड़ा संदेश देना भी है। बैंकिंग और सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिहार में EOU पिछले कुछ वर्षों से कई बड़े मामलों में सक्रिय रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के प्रति सरकार का रुख बेहद सख्त है।
आने वाले दिनों में बरामद दस्तावेजों और सामग्रियों की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी तथा मामले की गहन जांच जारी रहेगी। जांच पूर्ण होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई न्यायालय के निर्देशानुसार की जाएगी।
यह मामला न केवल पटना, बल्कि पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया है और बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी को मजबूत करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।