ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दबाव: डेनमार्क की सेना को ‘फर्स्ट शूट’ का आदेश

US pressure on Greenland: Danish military given 'first shoot' order.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रण में लेने के बार-बार के बयानों के बीच डेनमार्क ने सख्त रुख अपना लिया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि कोई विदेशी ताकत (चाहे वह कोई भी हो) उसके क्षेत्र पर हमला करती है, तो डेनिश सैनिक बिना किसी उच्च आदेश के इंतजार किए तुरंत जवाबी कार्रवाई करेंगे। इसे “शूट फर्स्ट, पूछो बाद में” की नीति के रूप में देखा जा रहा है।

यह नियम 1952 से लागू है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के हमले के अनुभव से निकला है। उस समय संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी और सैनिकों को स्पष्ट निर्देश नहीं मिल पाए थे। इसलिए यह फैसला लिया गया कि भविष्य में ऐसी स्थिति में सैनिक तुरंत हथियार उठाकर लड़ाई शुरू कर सकें, बिना कमांडरों की अनुमति के। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह नियम आज भी पूरी तरह प्रभावी है।

ग्रीनलैंड पर बढ़ता तनाव
ट्रम्प ने हाल ही में फिर दोहराया है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि वहां रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी बताई जा रही है। व्हाइट हाउस के अधिकारी यहां तक कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड हासिल करने के लिए सैन्य विकल्प भी “हमेशा उपलब्ध” है। ट्रम्प इसे एक बड़ी “रियल एस्टेट डील” मानते हैं, जैसा उन्होंने 2019 में भी कहा था।

ग्रीनलैंड, जो पिछले करीब 300 साल से डेनमार्क के अधीन है, अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच रणनीतिक स्थिति में है। इसकी विदेश और रक्षा नीति डेनमार्क तय करता है, हालांकि यह सेमी-ऑटोनॉमस है। यहां अमेरिका की 1951 की रक्षा संधि के तहत सैन्य मौजूदगी है, जिसमें पिटुफिक स्पेस बेस मिसाइल ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल होता है।

ग्रीनलैंडवासियों का विरोध
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने बार-बार कहा है कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है” और “एनेक्सेशन की कल्पनाएं बंद करें”। पिछले सर्वे में 85 प्रतिशत स्थानीय लोगों ने अमेरिकी कब्जे का विरोध किया था। हाल ही में व्हाइट हाउस में विचार हुआ है कि ग्रीनलैंड के लगभग 57 हजार नागरिकों को प्रति व्यक्ति 10 हजार से 1 लाख डॉलर तक देकर अमेरिका में शामिल होने के लिए राजी किया जाए, जिसकी कुल लागत 5-6 अरब डॉलर तक हो सकती है। लेकिन स्थानीय नेता इसे अपमानजनक मान रहे हैं।

डेनमार्क और यूरोप का कड़ा रुख
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने किसी नाटो सहयोगी (जैसे ग्रीनलैंड) पर हमला किया, तो नाटो गठबंधन और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था दोनों खत्म हो जाएंगी। यूरोप के कई नेता, जैसे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल उसके लोगों और डेनमार्क के हाथ में है।

यह तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब ट्रम्प प्रशासन अन्य क्षेत्रों में भी आक्रामक रुख अपना रहा है। डेनमार्क ने अमेरिका को अधिक सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का ऑफर दिया था, लेकिन व्हाइट हाउस ने इसे ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।

यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया संकट पैदा कर रही है, जहां नाटो सहयोगी देशों के बीच विश्वास पर सवाल उठ रहे हैं।

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