संसद के बजट सत्र के चौथे दिन सोमवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब डोकलाम मुद्दे को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनके बयान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस पर भारतीय संस्कृति को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनकी पार्टी इन आरोपों का जवाब देगी। इसके बाद उन्होंने डोकलाम से जुड़े मुद्दे पर पूर्व थल सेनाध्यक्ष मनोज नरवणे की एक किताब का हवाला देते हुए अपनी बात रखनी शुरू की।
राहुल गांधी के इस उल्लेख पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए और सवाल किया कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, क्या वह वास्तव में प्रकाशित हुई है। उन्होंने कहा कि किताब के प्रकाशित न होने की स्थिति में उसके आधार पर बयान देना उचित नहीं है। इस पर सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से उनके स्रोत को प्रमाणित करने को कहा। राहुल गांधी ने जवाब दिया कि किताब को सरकार द्वारा प्रकाशित नहीं होने दिया जा रहा है, लेकिन वह पूरी तरह प्रमाणिक है।
इसके जवाब में राजनाथ सिंह ने दोहराया कि अप्रकाशित और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होने वाली किताब के आधार पर सदन में बयान देना सदन को गुमराह करने जैसा है। इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी स्वयं यह मान रहे हैं कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है, जिससे विवाद स्वतः समाप्त हो जाता है।
स्पीकर ओम बिरला ने सदन को याद दिलाया कि अखबारों की कटिंग या अप्रकाशित पुस्तकों के आधार पर चर्चा करने की परंपरा नहीं रही है और कार्यवाही नियमों के अनुसार ही चलाई जानी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से आगे बढ़ने को कहा। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह यह मुद्दा नहीं उठाना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों के कारण उन्हें जवाब देना पड़ा। इसके बावजूद, स्पीकर ने दोहराया कि सदन में बोलने का अधिकार नियमों और परंपराओं के तहत ही प्रयोग किया जाना चाहिए। पूरे घटनाक्रम के दौरान लोकसभा में हंगामा जारी रहा।