फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित आरव हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे दुर्लभतम मामलों में से एक मानते हुए मृत्युदंड का आदेश दिया। साथ ही दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया।
शादी से इनकार के बाद हुई थी वारदात
मामले के अनुसार, जितेंद्र पाठक उर्फ विराज ने बच्चे की मां को शादी का प्रस्ताव दिया था। महिला द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद उसने मासूम आरव को कथित रूप से अपना रास्ते का बाधक मान लिया। इसके बाद उसने बच्चे को बहाने से अपने साथ ले जाकर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था।
सीसीटीवी और अन्य साक्ष्य बने अहम आधार
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और आसपास से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य सबूतों को अदालत में पेश किया गया, जिनके आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना मामला मजबूत किया।
पुलिस मुठभेड़ के बाद हुई थी गिरफ्तारी
वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें गठित की थीं। बाद में मुठभेड़ के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उसके कब्जे से अवैध हथियार भी बरामद किए थे।
अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए जितेंद्र पाठक उर्फ विराज को दोषी करार दिया। अदालत ने मामले को गंभीर और दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर जुर्माना भी लगाया गया।
मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था
आरव हत्याकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। मासूम की हत्या के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी। अदालत के फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।