बिहार: पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान संचालन को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। लंबे समय से जमीन की कमी के कारण अटका रडार इंस्टॉलेशन प्रोजेक्ट अब गति पकड़ने जा रहा है। जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रशासन को रडार स्थापना के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर एक-एक एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है, जिससे पटना एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन की राह लगभग साफ हो गई है।
जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित दो भूखंडों में से एक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की जमीन है, जिसे जल्द ही औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर एयरपोर्ट प्रशासन को सौंपा जाएगा। इसके अलावा बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) की एक एकड़ जमीन भी एयरपोर्ट को उपलब्ध कराई जाएगी। यह भूखंड बिहार राज्य पथ विकास निगम के कार्यालय के पीछे स्थित है, जहां पहले मॉल निर्माण की योजना थी। सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट प्रशासन की आपत्ति के बाद इस जमीन को रडार परियोजना के लिए उपयुक्त माना गया।
फिलहाल पटना एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन विजुअल और नेविगेशन सिस्टम के सहारे किया जा रहा है। यहां से प्रतिदिन करीब 45 जोड़ी उड़ानों की आवाजाही होती है। हाल के वर्षों में लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक नया टर्मिनल भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन रडार की अनुपस्थिति के कारण उड़ानों की संख्या और समय-सारिणी सीमित है। खराब मौसम, कोहरे और कम दृश्यता के दौरान विमानों के संचालन में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, रडार स्थापित होने के बाद एक ही रनवे पर अधिक विमानों की सुरक्षित लैंडिंग और टेकऑफ संभव हो सकेगी। रडार से एयर ट्रैफिक कंट्रोल को रियल टाइम डेटा मिलेगा, जिससे विमानों की सटीक स्थिति, गति और आपसी दूरी पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इससे न केवल सुरक्षा मानकों में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों में देरी और रद्द होने की समस्या भी कम होगी।
अधिकारियों का कहना है कि रडार लगने के बाद पटना एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन सुचारु रूप से किया जा सकेगा। अब तक तकनीकी सीमाओं के कारण इंटरनेशनल फ्लाइट ऑपरेशन में कई अड़चनें थीं, जिन्हें रडार के माध्यम से काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। कागजी कार्रवाई, तकनीकी मंजूरी और इंस्टॉलेशन समेत पूरी प्रक्रिया में करीब छह महीने का समय लग सकता है।
राज्य के अन्य हवाई अड्डों की बात करें तो दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट पर एयरफोर्स बेस के तहत रडार की सुविधा पहले से मौजूद है, जबकि गया एयरपोर्ट पर अभी रडार नहीं लगाया गया है। ऐसे में पटना एयरपोर्ट पर रडार की स्थापना को बिहार की हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है।