नई दिल्ली: आतंकी संगठन Islamic State ने भारत को निशाना बनाने के लिए नई रणनीति तैयार की है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, संगठन अब भारत के पड़ोसी देशों में सक्रिय अपने चरमपंथी मॉड्यूल के जरिए देश में दुष्प्रचार फैलाने और आतंकी हमलों की साजिश रच रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2013 में वैश्विक स्तर पर सक्रिय होने के बाद इस्लामिक स्टेट से जुड़ने के लिए भारत से भी कई लोग सीरिया, इराक और अफगानिस्तान गए थे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कई युवाओं को संगठन में शामिल होने से रोका और डी-रेडिकलाइजेशन अभियानों के जरिए उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने में सफलता हासिल की।
पड़ोसी देशों से भारत में घुसपैठ की कोशिश
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि भारत में संगठन की गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन अब आईएसआईएस पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका में सक्रिय अपने मॉड्यूल के जरिए भारत में घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है।
बताया गया कि श्रीलंका मॉड्यूल का प्रभाव तमिलनाडु और मंगलुरु में देखने को मिला था, जहां कट्टरपंथ से प्रभावित कुछ लोगों ने हमले की कोशिश की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें विफल कर दिया। जांच में सामने आया कि आरोपी जेमेशा मुबीन और मोहम्मद शारिक को श्रीलंका के एक ही व्यक्ति ने कट्टरपंथ की ओर धकेला था।
‘ईस्टर बम धमाकों’ के मास्टरमाइंड का कनेक्शन
सूत्रों के अनुसार, श्रीलंका के चर्चित 2019 Sri Lanka Easter bombings के मास्टरमाइंड जहरान हाशिम का दक्षिण भारत से भी संपर्क रहा था। बताया गया कि वह लंबे समय तक दक्षिण भारत में रहा और इसी दौरान कुछ युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित किया।
बंगाल और बिहार पर विशेष नजर
अधिकारियों के मुताबिक, बांग्लादेश में सक्रिय मॉड्यूल पश्चिम बंगाल और बिहार में युवाओं की भर्ती पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। वहीं दक्षिण भारत में श्रीलंका और मालदीव के जरिए कट्टरपंथी नेटवर्क फैलाने की कोशिश की जा रही है।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि बांग्लादेश को संगठन सबसे मुफीद रास्ता मान रहा है। आईएसआईएस के मुखपत्र ‘दाबिक’ में हाल ही में ‘बंगाल में जिहाद की वापसी’ शीर्षक से लेख प्रकाशित किया गया था, जिसका उद्देश्य युवाओं को भड़काना बताया जा रहा है।
विदेशी आतंकियों के जरिए हमले की योजना
अधिकारियों का कहना है कि संगठन भारत में बड़े स्तर के हमले की योजना बना रहा है और इसके लिए विदेशी आतंकियों का इस्तेमाल करना चाहता है। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि विदेशी लड़ाकों की पहचान और गतिविधियों का रिकॉर्ड सीमित होता है, जबकि उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आईएसआईएस भारतीय मॉड्यूल को भी हमलों के लिए उकसा रहा है, लेकिन कई प्रयास विफल रहे हैं। ऐसे में संगठन विदेशी मॉड्यूल के जरिए हमले कर भारतीय युवाओं को प्रभावित करने और नए लोगों की भर्ती बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।