बिहार में कम उम्र की महिलाओं की बच्चेदानी निकालने के आरोप, केंद्र ने दिए जांच के आदेश

Allegations of Uterine Removals in Young Women in Bihar; Centre Orders Probe

पटना: बिहार में महिलाओं की सेहत को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। राज्य के कई जिलों से शिकायतें मिल रही हैं कि 40 साल से कम उम्र की महिलाओं की बिना ठोस चिकित्सकीय कारण के बच्चेदानी (यूटेरस) निकाली जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पूरे राज्य में जांच के आदेश दिए हैं।

मंत्रालय के निर्देश के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है और सभी जिलों को विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। नई गाइडलाइन जारी करते हुए स्पष्ट किया गया है कि 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं की बच्चेदानी निकालना बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है और इसे सामान्य इलाज की तरह नहीं अपनाया जा सकता।

इससे पहले भी राज्य में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां बिना पर्याप्त कारण के महिलाओं की सर्जरी कर दी गई थी। कुछ मामलों में डॉक्टरों और क्लीनिकों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन शिकायतें अब भी जारी हैं।

हर केस की होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत अब अस्पतालों में आने वाली महिलाओं से यह जानकारी ली जाएगी कि उनकी बच्चेदानी निकाली गई है या नहीं। यदि ऐसा हुआ है, तो ऑपरेशन कहां, किस डॉक्टर द्वारा और किन कारणों से किया गया—इसकी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी और संदिग्ध मामलों की जांच की जाएगी।

जांच की जिम्मेदारी जिला स्तर पर गठित कमेटी को दी गई है, जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन करेंगे। गैर-संचारी रोग (NCD) स्क्रीनिंग के दौरान भी इस पहलू को शामिल किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा मामलों की पहचान हो सके।

मुजफ्फरपुर का मामला फिर चर्चा में
इस मुद्दे के बीच मुजफ्फरपुर जिले का एक पुराना मामला भी फिर सुर्खियों में है, जहां ऑपरेशन के दौरान कथित लापरवाही में एक महिला की बच्चेदानी के साथ उसकी दोनों किडनी निकाल ली गई थीं। लंबे इलाज के बाद महिला की मौत हो गई थी, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।

डॉक्टरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
नई गाइडलाइन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया है। इसमें यह बताया जाएगा कि किन परिस्थितियों में बच्चेदानी निकालना जरूरी होता है और किन मामलों में इससे बचा जा सकता है।

जागरूकता पर भी जोर
स्वास्थ्य विभाग ने महिलाओं को जागरूक करने पर भी जोर दिया है, ताकि वे बिना जरूरत ऐसे ऑपरेशन के लिए सहमति न दें। विभाग का मानना है कि जानकारी की कमी और डर के कारण कई महिलाएं बिना पूरी समझ के सर्जरी के लिए तैयार हो जाती हैं।

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