पटना: बिहार सरकार पात्र परिवारों तक जल्द से जल्द राशन कार्ड पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चला रही है। लेकिन इस अभियान के बीच एक बड़ी प्रशासनिक समस्या सामने आई है। विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया के कारण हजारों राशन कार्ड आवेदन लंबित हो गए हैं। नियमों के अनुसार शादीशुदा महिलाओं का जाति प्रमाणपत्र उनके मायके से जारी होता है, जबकि राशन कार्ड के लिए आवेदन ससुराल के पते से किया जा रहा है। इसी वजह से बड़ी संख्या में आवेदनों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर
इस समस्या का सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ रहा है। कई महिलाओं को जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बार-बार अपने मायके के अंचल कार्यालय जाना पड़ रहा है। इससे यात्रा का अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है और रोज कमाने वाले परिवारों की मजदूरी भी प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप राशन कार्ड बनने में देरी हो रही है और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।
आय और आवासीय प्रमाणपत्र आसानी से बन रहे
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार आय प्रमाणपत्र और आवासीय प्रमाणपत्र स्थानीय स्तर पर आसानी से बन रहे हैं। लेकिन जाति प्रमाणपत्र के लिए विवाहित महिलाओं को अपने मायके के संबंधित अंचल कार्यालय से ही दस्तावेज बनवाना पड़ता है। यदि मायका दूसरे जिले में है, तो यह प्रक्रिया और अधिक कठिन हो जाती है। इसी कारण सत्यापन पूरा होने के बावजूद बड़ी संख्या में आवेदन स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं।
सारण जिले में सबसे अधिक प्रभावित हुआ अभियान
इस समस्या का सबसे बड़ा असर सारण जिले में देखने को मिला है। जिले में 13 अगस्त तक 49,455 नए राशन कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन लोगों की भारी भागीदारी के कारण 2 अगस्त तक ही 57,549 आवेदन प्राप्त हो गए।
इनमें से 52,007 आवेदनों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 5,602 आवेदन अब भी लंबित हैं। अधिकारियों के अनुसार इनमें से लगभग 5,000 आवेदन केवल विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र नहीं होने की वजह से अटके हुए हैं।
अभियान में तेजी से आए आवेदन
विशेष अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने राशन कार्ड के लिए आवेदन किया। आंकड़ों के अनुसार—
- 31 जुलाई को 6,211 आवेदन प्राप्त हुए।
- 1 अगस्त को 2,318 आवेदन जमा हुए।
- 2 अगस्त को 726 नए आवेदन मिले।
हालांकि आवेदन तेजी से आए, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण हजारों फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं।
प्रशासन के सामने लंबित आवेदनों के निपटारे की चुनौती
अब जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधूरे दस्तावेजों को समय पर पूरा कराना और लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा करना है। यदि जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया का समाधान नहीं निकाला गया, तो हजारों पात्र परिवार तय समय सीमा के भीतर राशन कार्ड से वंचित रह सकते हैं।
प्रक्रिया आसान बनाने की उठी मांग
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों और लाभार्थियों का कहना है कि विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था या स्थानीय सत्यापन प्रणाली लागू करता है, तो हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है। इससे विशेष राशन कार्ड अभियान भी तेजी से आगे बढ़ेगा और जरूरतमंद लोगों तक सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ समय पर पहुंच सकेगा।