नई दिल्ली: सोमवार को ‘एसबीआई रिसर्च’ ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया कि भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए ट्रेड रेसिप्रोकल टैरिफ का असर लगभग नगण्य रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने निर्यात में विभिन्न क्षेत्रों में विविधताएं ला रहा है और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जा रहा है, जिससे इसका प्रभाव सीमित रहेगा।
इसके अलावा, भारत नए वैकल्पिक क्षेत्रों की तलाश कर रहा है। यूरोप से लेकर मध्य पूर्व और अमेरिका तक नए व्यापार मार्गों पर काम किया जा रहा है, साथ ही नए सप्लाई चेन एल्गोरिदम को भी फिर से तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि निर्यात में गिरावट 3-3.5 प्रतिशत तक रह सकती है, जिसे मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में उच्च निर्यात लक्ष्यों के माध्यम से सुधारने की उम्मीद है।
भारत को मिल सकता है फायदा
भारत को अमेरिका द्वारा लगाए गए एल्यूमीनियम और स्टील टैरिफ से भी लाभ हो सकता है। भारत का अमेरिका के साथ एल्यूमीनियम व्यापार में 13 मिलियन डॉलर और स्टील व्यापार में 406 मिलियन डॉलर का घाटा है, जिसका भारत संभावित रूप से लाभ उठा सकता है।
रेसिप्रोकल टैरिफ कब से लागू होगा?
यूएस रेसिप्रोकल टैरिफ 2 अप्रैल से लागू होने की संभावना है। इस बीच, नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच द्विपक्षीय वार्ताएं जारी हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्होंने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा की है।
गोयल ने इस बैठक की एक तस्वीर भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा की और लिखा, “हमारा दृष्टिकोण ‘इंडिया फर्स्ट’, ‘विकसित भारत’ और हमारी रणनीतिक साझेदारी द्वारा निर्देशित होगा।”
(स्रोत – IANS)