बिहार की तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMU) में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लागू करने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र शिकायत निवारण कोषांग के गठन का आदेश जारी कर दिया था। विवाद बढ़ने के बाद कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त आदेश को वापस ले लिया।
छात्र शिकायत निवारण कमिटी के गठन की अधिसूचना जारी होते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इसका विरोध शुरू कर दिया। छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आदेश जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की और आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों से विद्यार्थियों के बीच जातीय भेदभाव फैलाने की साजिश की जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलपति ने कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे को आदेश वापस लेने के साथ-साथ शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। कुलपति ने स्पष्ट किया कि उनकी अनुमति के बिना ही कमिटी गठन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई थी।
गौरतलब है कि पिछले महीने यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत छात्र शिकायत निवारण कमिटी का गठन अनिवार्य किया गया था। हालांकि, सवर्ण वर्ग के छात्रों ने इन नियमों को एकतरफा बताते हुए विरोध किया और आशंका जताई कि इससे सवर्ण छात्रों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।
विवाद के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने सरकार और यूजीसी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है और आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नए नियम लागू नहीं किए जाएंगे।