बिहार यूनिवर्सिटी में डिग्री फीस विवाद: छात्रों से दोबारा वसूली, पारदर्शिता की मांग

Degree fee dispute in Bihar University: Re-recovery from students, demand for transparency

बिहार की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है, और अब मुजफ्फरपुर के बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर बिहार यूनिवर्सिटी (बीआरएबीयू) में एक नया विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय 2019 से पहले के विद्यार्थियों से डिग्री जारी करने के लिए दोबारा फीस वसूल रहा है, वह भी पहले जमा की गई 100 रुपये की फीस के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक, यानी 400 रुपये। इस दोहरी वसूली के खिलाफ छात्रों में भारी नाराजगी है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

छात्रों ने इस अन्याय के खिलाफ कई बार विरोध दर्ज किया और छात्र संवाद कार्यक्रम में भी अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला। बीआरएबीयू के छात्रों का कहना है कि उन्होंने डिग्री के लिए न केवल विश्वविद्यालय को, बल्कि अपने कॉलेजों को भी फीस दी है। छात्र नेता गोल्डेन सिंह ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन एक ही डिग्री के लिए दो बार फीस वसूल रहा है, जिससे छात्रों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

परीक्षा विभाग ने कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से डिग्री और अंक पत्र विश्वविद्यालय से लें, लेकिन कई कॉलेज इस आदेश का पालन नहीं कर रहे। खासकर डिस्टेंस एजुकेशन की डिग्रियां विश्वविद्यालय से नहीं उठाई जा रही हैं। एक छात्रा ने बताया कि उसकी डिग्री 13 अगस्त को तैयार हो चुकी थी, लेकिन डिस्टेंस एजुकेशन के कर्मचारी ने कहा कि कम से कम 10 डिग्रियां तैयार होने तक वे डिग्री नहीं लाएंगे। इससे छात्रों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया है कि उन्हें दो बार फीस वसूली की कोई जानकारी नहीं है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अब छात्रों को कॉलेज और विश्वविद्यालय दोनों जगह फीस नहीं देनी होगी। साथ ही, अगर कोई छात्र दोबारा फीस जमा करने की कोशिश करेगा, तो वेबसाइट स्वतः लॉक हो जाएगी। इस समस्या के समाधान के लिए विश्वविद्यालय जल्द ही एक समन्वय समिति बनाने की योजना बना रहा है, जो छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई करेगी।

इस कदम से उम्मीद है कि भविष्य में डिग्री प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान होगी और बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, छात्रों का कहना है कि प्रशासन को उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना होगा और समय पर समाधान करना होगा, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रहे।

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