नई दिल्ली: हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक यात्री ने आरोप लगाया कि प्रीमियम ट्रेन में चाय और भोजन रेलवे के तय मानकों के अनुसार नहीं परोसा गया। इसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या भारतीय रेलवे के पास खाने-पीने के सामान को परोसने के लिए कोई तय नियम हैं? आइए जानते हैं कि रेलवे और IRCTC की कैटरिंग पॉलिसी इस बारे में क्या कहती है।
प्रीमियम ट्रेनों में क्या हैं नियम?
भारतीय रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था के अनुसार वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी और अन्य प्रीमियम ट्रेनों की कुछ श्रेणियों में यात्रियों को भोजन और पेय पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता वाले बर्तनों में परोसे जाने का प्रावधान है। विशेष रूप से एक्जीक्यूटिव क्लास और फर्स्ट एसी जैसी श्रेणियों में बेहतर सर्विस स्टैंडर्ड बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।
क्या हर बार क्रॉकरी में ही मिलेगा खाना?
रेलवे के दिशा-निर्देश सेवा की गुणवत्ता तय करते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में परिचालन, सुरक्षा या अन्य व्यावहारिक कारणों से डिस्पोजेबल कप या फूड कंटेनर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यदि सेवा तय मानकों के अनुरूप नहीं मिलती है, तो यात्री शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
अगर तय सुविधा नहीं मिले तो क्या करें?
यदि किसी यात्री को लगता है कि उसे टिकट में शामिल कैटरिंग सेवा तय मानकों के अनुसार नहीं मिली, तो वह रेलवे या IRCTC के शिकायत पोर्टल, हेल्पलाइन या रेल मदद (RailMadad) के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित कैटरिंग एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?
हालिया वायरल वीडियो के बाद कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने प्रीमियम किराया देने वाले यात्रियों को बेहतर सेवा मिलने की बात कही, जबकि कुछ ने रेलवे से सेवा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग की।
रेलवे का फोकस बेहतर कैटरिंग पर
भारतीय रेलवे समय-समय पर कैटरिंग सेवाओं के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर देता है। यदि किसी ट्रेन में भोजन या सर्विस निर्धारित मानकों से कम पाई जाती है, तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई भी की जा सकती है।