कतर में अमेरिकी रडार सिस्टम पर ईरान का हमला, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Iran attacks US radar system in Qatar, raising tensions in the Middle East

नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंद महासागर में अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिका के महत्वपूर्ण बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम को क्षतिग्रस्त कर दिया।

बताया जा रहा है कि यह हमला कतर में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक-5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम पर किया गया। इस अत्याधुनिक रडार सिस्टम की लागत करीब 1.1 अरब डॉलर (लगभग 9000 करोड़ रुपये) बताई जाती है। सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी प्लैनेट लैब्स की हालिया तस्वीरों में रडार परिसर के आसपास आग और भारी नुकसान के संकेत दिखाई दिए हैं, जहां आग बुझाने और नुकसान पर काबू पाने की कोशिशें जारी हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले की जिम्मेदारी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ली है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने इस ऑपरेशन में मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ‘शाहेद’ ड्रोन का इस्तेमाल किया। इन ड्रोन के झुंड ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए रडार सिस्टम को निशाना बनाया।

यह रडार सिस्टम अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन द्वारा विकसित किया गया था और इसे अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा माना जाता है। बताया जाता है कि यह सिस्टम लगभग 5000 किलोमीटर दूर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने में सक्षम था और ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये सहित पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर निगरानी रखता था।

अमेरिकी रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो सकता है। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यदि इस तरह की घटनाएं बढ़ती हैं तो मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

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