आइटम गर्ल कुक्कू मोरे की जिंदगी: शोहरत से गिरावट तक का दर्दनाक सफर

Item girl Kuku More's life: A painful journey from fame to downfall

आइटम गर्ल कुक्कू मोरे का नाम बॉलीवुड के उस दौर में चर्चा में था जब उनकी डांस और एक्सप्रेशन की दीवानगी ने सिनेमा प्रेमियों को अपना दीवाना बना लिया था। कुक्कू मोरे का कैबरे डांस इतना हिट था कि निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में शामिल करने के लिए मजबूर हो गए थे। एक वक्त था जब वह अपने करियर के पीक पर थी और अपनी आलिशान जिंदगी जी रही थीं, जिसका सपना हर कोई देखता था। आइए जानते हैं कुक्कू मोरे के बारे में कुछ ऐसी बातें, जो आपको हैरान कर देंगी।

‘रबर गर्ल’ के नाम से प्रसिद्ध कुक्कू मोरे
कुक्कू मोरे के डांस का क्रेज 50 के दशक में इतना ज्यादा था कि वह एक डांस के लिए 6000 रुपये तक लेती थीं। उस वक्त यह रकम काफी बड़ी मानी जाती थी और निर्माता उन्हें यह रकम खुशी-खुशी देने के लिए तैयार रहते थे। कुक्कू ने 1946 में फिल्म ‘अरब का सितारा’ से डेब्यू किया और अपनी शानदार डांसिंग और कैबरे स्टाइल से लोगों को दीवाना बना लिया। इसी कारण उन्हें ‘रबर गर्ल’ के नाम से भी जाना जाने लगा।

कुत्ते के लिए थी अलग कार
कुक्कू मोरे ने अपनी पीक पर रहते हुए आलिशान जिंदगी जी थी। कहा जाता है कि वह रोज पांच सितारा होटल से खाना मंगवाती थीं और उनके पास कई लग्जरी बंगले और फ्लैट्स थे। इसके अलावा, उनके पास कई गाड़ियां थीं, जिनमें से एक गाड़ी वह सिर्फ अपने कुत्ते को घुमाने के लिए इस्तेमाल करती थीं।

महंगे सामानों की शौकीन कुक्कू
कुक्कू के पास 5,000 चप्पलें और 8,000 से ज्यादा डिजाइनर ड्रेसेज थीं। इसके साथ ही उनके पास महंगी जूलरी और कई फ्लैट्स भी थे। कुक्कू मोरे ने अपनी शान-ओ-शौकत में कोई कमी नहीं छोड़ी थी, लेकिन कुछ सालों में ही उनकी किस्मत ने उनका साथ छोड़ दिया।

आयकर विभाग के छापे से हुआ नुकसान
कुक्कू मोरे की ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जब आयकर विभाग ने उनके ऊपर छापा मारा और उनकी बहुत सारी संपत्ति जब्त कर ली। इसके बाद उनकी ज़िंदगी में गिरावट आनी शुरू हो गई, और वह पाई-पाई के लिए मोहताज हो गईं।

दाने-दाने को मोहताज हो गईं कुक्कू मोरे
कुक्कू मोरे का कहना था कि वह अपनी हालत की जिम्मेदार खुद हैं क्योंकि जब उनके पास पैसे थे, तब उन्होंने उनकी कद्र नहीं की और उन्हें पानी की तरह बहा दिया। फिल्म इंडस्ट्री से दूर होने के बाद वह कभी पांच सितारा होटल से खाना मंगवाती थीं, लेकिन बाद में वह सब्जी मंडी में जाकर बची हुई सब्जियां चुनकर खाती थीं। कई बार तो वह सड़क पर पड़े डंठल भी उठाकर खाती थीं।

अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे
कुक्कू मोरे को कैंसर हो गया था और उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। 30 सितंबर 1981 को कैंसर के कारण उनकी मौत हो गई, लेकिन इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री से कोई भी उनके अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचा। कुछ लोगों ने मिलकर उनका अंतिम संस्कार किया।

कुक्कू मोरे की ज़िंदगी का यह उतार-चढ़ाव यह दिखाता है कि कभी उच्च शिखर पर रही एक शख्सियत भी किस तरह मुश्किलों का सामना करती है और उसका सब कुछ खत्म हो सकता है।

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