वाशिंगटन/नई दिल्ली : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह युद्धविराम दोनों देशों के डीजीएमओ (सेना संचालन महानिदेशक) के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था, न कि किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता का।
वॉशिंगटन में क्वॉड शिखर सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत करते हुए जयशंकर ने कहा, “हमें पता है कि उस समय क्या हुआ था, अब उसे वहीं छोड़ देना चाहिए।” उनके इस बयान से ट्रंप के उस पुराने दावे को झटका लगा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने व्यापार को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर भारत-पाक के बीच परमाणु युद्ध को रोका।
जयशंकर ने दो टूक कहा कि सीजफायर का निर्णय भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ की सीधी और पेशेवर बातचीत से हुआ था, और यह रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका या ट्रंप की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने 26 भारतीयों की हत्या कर दी थी। इसके जवाब में भारत ने 6-7 मई की रात पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमला किया, जिसे भारत ने न केवल नाकाम किया, बल्कि 11 पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर पलटवार कर उन्हें तबाह भी कर दिया।
बुरी तरह झेलने के बाद पाकिस्तान ने सीजफायर की गुहार लगाई और 9-10 मई को दोनों देशों में युद्धविराम हुआ। इसी पर ट्रंप बार-बार दावा करते रहे कि उन्होंने ही दोनों देशों के बीच युद्ध टलवाया। हालांकि भारत सरकार पहले भी इन दावों को खारिज कर चुकी है और अब विदेश मंत्री ने भी इसे पूरी तरह से नकार दिया है।