कम उम्र में शादी, डिलीवरी के दौरान दर्दनाक हादसा… फिर भी नहीं टूटा हौसला, मालिनी अवस्थी ने ऐसे बनाई अपनी पहचान

Marriage at a young age, a traumatic ordeal during childbirth... yet her spirit remained unbroken; here is how Malini Awasthi carved out her identity.

पटना : भारतीय लोक संगीत की मशहूर आवाज मालिनी अवस्थी ने अपनी जिंदगी के संघर्षों को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। अपनी सुरीली आवाज और लोकगीतों के लिए पहचान बनाने वाली मालिनी अवस्थी ने बताया कि उनकी सफलता की राह आसान नहीं थी। कम उम्र में शादी, परिवार की जिम्मेदारियां और डिलीवरी के दौरान हुई स्वास्थ्य समस्या के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा संगीत की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

मालिनी अवस्थी ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें अपने करियर से दूरी बनानी पड़ी थी। हालांकि संगीत उनके दिल के करीब रहा और उन्होंने मुश्किल हालातों के बाद भी अपने सपनों को जिंदा रखा।

कम उम्र में हो गई थी शादी

मालिनी अवस्थी ने बताया कि जब उनकी शादी हुई, तब वह उम्र के उस पड़ाव पर थीं जहां उनका संगीत करियर आगे बढ़ रहा था। वह पहले ही कई कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुकी थीं और अपनी पहचान बना रही थीं।

लेकिन परिवार की परिस्थितियों के चलते उनकी शादी जल्दी हो गई। शादी के बाद जीवन की प्राथमिकताएं बदल गईं और कुछ समय के लिए उन्होंने संगीत की दुनिया से दूरी बना ली।

डिलीवरी के दौरान झेलना पड़ा दर्द

मालिनी अवस्थी ने अपनी बातचीत में बताया कि शादी के बाद वह जल्द ही मां बन गई थीं। उस समय उनकी उम्र करीब 20 साल थी। डिलीवरी सामान्य तरीके से हुई थी, लेकिन इसी दौरान उन्हें एक गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि डिलीवरी के दौरान उनकी टेल बोन (रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से) में चोट आ गई थी। शुरुआत में उन्हें इसका पता नहीं चल पाया और वह लंबे समय तक दर्द से परेशान रहीं।

लंबे समय तक दर्द से जूझती रहीं

मालिनी अवस्थी के मुताबिक, उस समय वह नई मां बनी थीं और बच्चे की देखभाल में व्यस्त थीं। इसलिए उन्हें लगा कि शायद डिलीवरी के बाद होने वाला सामान्य दर्द है।

लेकिन जब परेशानी ज्यादा बढ़ी और जांच कराई गई तो पता चला कि उनकी टेल बोन में चोट थी। उन्होंने बताया कि उस समय यह दौर उनके लिए काफी मुश्किल भरा था।

परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी निभाई

मुश्किल हालात के बावजूद मालिनी अवस्थी ने अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाया। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और बच्चों की परवरिश पर ध्यान दिया।

कुछ समय बाद उन्होंने फिर से संगीत की ओर वापसी करने का फैसला लिया। यह वापसी आसान नहीं थी, लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें दोबारा पहचान दिलाई।

40 की उम्र में फिर शुरू किया सफर

मालिनी अवस्थी ने बताया कि उन्होंने करीब 40 साल की उम्र के बाद लोक संगीत की दुनिया में फिर से सक्रिय कदम रखा। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और देश-विदेश में लोकगीतों के लिए जानी जाने लगीं।

उनकी आवाज में उत्तर भारत की लोक परंपरा की झलक दिखाई देती है। उन्होंने ठुमरी, कजरी, चैती और अन्य लोक विधाओं को मंचों तक पहुंचाया।

संघर्ष ने बनाया मजबूत

मालिनी अवस्थी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से दूर हो जाते हैं। उन्होंने दिखाया कि जीवन में रुकावटें आने के बावजूद मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

उनका सफर बताता है कि सफलता सिर्फ कम उम्र में नहीं मिलती, बल्कि सही समय आने पर लगातार प्रयास से भी हासिल की जा सकती है।

मालिनी अवस्थी की जिंदगी सिर्फ एक सफल गायिका की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, धैर्य और वापसी की कहानी भी है। कम उम्र में शादी, स्वास्थ्य से जुड़ी मुश्किलें और लंबे अंतराल के बाद भी उन्होंने संगीत के प्रति अपने जुनून को बनाए रखा और एक अलग मुकाम हासिल किया।

आज वह भारतीय लोक संगीत की उन आवाजों में शामिल हैं, जिन्होंने परंपरागत संगीत को नई पहचान दिलाई है।

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