नई दिल्ली : ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण की वकालत की

New Delhi: British MP Bob Blackman advocated for the complete integration of Jammu and Kashmir.

ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू और कश्मीर के पूरे क्षेत्र को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इसके पूर्ण एकीकरण की जोरदार पैरवी की है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान के कब्जे का विरोध करते रहे हैं और इस मुद्दे पर उनका रुख हमेशा स्पष्ट रहा है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ब्लैकमैन ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह दशकों से इस प्रावधान को समाप्त करने के पक्ष में रहे हैं। एएनआई के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसे चुनावी घोषणापत्र में शामिल किए जाने के बाद नहीं उठी, बल्कि वे वर्ष 1992 से ही इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं।

ब्लैकमैन ने बताया कि 1990 के दशक की शुरुआत में जम्मू और कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय उन्होंने इस विषय पर कई बैठकों में हिस्सा लिया था। उस दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि केवल धर्म के आधार पर लोगों को उनके पैतृक घरों से बाहर निकाला जाना एक गंभीर अन्याय था, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जागरूकता फैलाने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा कि वह न सिर्फ आतंकवाद के मुखर आलोचक रहे हैं, बल्कि जम्मू और कश्मीर रियासत के एक हिस्से पर पाकिस्तान के कथित अवैध कब्जे के भी विरोधी रहे हैं। उनके अनुसार, पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत के शासन के तहत दोबारा एकीकृत किया जाना चाहिए।

इससे पहले वर्ष 2016 में दिए गए एक साक्षात्कार में भी ब्लैकमैन ने कहा था कि पाकिस्तानी बलों ने अवैध रूप से जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर रखा है और उन्हें वहां से हटना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि विस्थापित लोगों को न्याय मिलना चाहिए और कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ब्लैकमैन ने यह सुझाव भी दिया कि भारत सरकार को कम से कम दो स्मार्ट सिटी विकसित करनी चाहिए, ताकि आंतरिक रूप से विस्थापित कश्मीरी पंडितों को घाटी में लौटने और नया जीवन शुरू करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह की त्रासदी या हिंसा की पुनरावृत्ति न हो।

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