नई दिल्ली: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था बनी मजबूत – आरबीआई बुलेटिन

New Delhi: Indian economy remains strong amidst global challenges – RBI Bulletin

नई दिल्ली: व्यापारिक तनाव, नीतिगत अनिश्चितता और कमजोर उपभोक्ता भावना जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती बनाए हुए है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा बुलेटिन में यह बात सामने आई है।

उद्योग और सेवा क्षेत्रों में बनी रफ्तार
बुलेटिन के अनुसार, अप्रैल 2024 में उद्योग और सेवा क्षेत्रों के उच्च-गति संकेतकों (High-Frequency Indicators) ने अपनी सकारात्मक गति बनाए रखी। इसके साथ ही रबी की बंपर फसल और गर्मियों की फसलों के लिए बढ़ा हुआ बोवाई रकबा, साथ ही 2025 के लिए अनुकूल मानसून का पूर्वानुमान कृषि क्षेत्र के लिए उत्साहजनक संकेत देता है।

मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, गरीबों को राहत
बुलेटिन में बताया गया कि हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति लगातार छठे महीने अपने निम्नतम स्तर पर रही, जिसका प्रमुख कारण खाद्य कीमतों में गिरावट है। अप्रैल 2024 में कृषि श्रमिकों (CPI-AL) और ग्रामीण श्रमिकों (CPI-RL) के लिए महंगाई दर घटकर क्रमशः 3.48% और 3.53% रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह क्रमशः 7.03% और 6.96% थी। इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों को राहत मिली है।

घरेलू बाजार में सुधार, निवेशकों को उम्मीद
अप्रैल में घरेलू वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन मई के तीसरे सप्ताह से इसमें सुधार शुरू हुआ। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद बाजारों में गिरावट आई थी, लेकिन बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों के चलते बाजार में फिर से उत्साह लौटा।

बदलती अर्थव्यवस्था और मुद्रा का उपयोग
RBI बुलेटिन में यह भी बताया गया कि 2014 से 2024 के बीच संचालित मुद्रा (Notes in Circulation – NIC) की वृद्धि दर पिछले दो दशकों की तुलना में काफी कम रही है। 1994-2004 के दौरान यह दर जीडीपी की तुलना में कहीं अधिक थी, लेकिन अब यह काफी हद तक संतुलित हो गई है।

नाइटलाइट डेटा से आर्थिक गतिविधि का आकलन
बुलेटिन में यह भी उल्लेख है कि नाइटलाइट्स और जीडीपी व नाइटलाइट्स और कर संग्रहण के बीच सकारात्मक संबंध बना हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि औपचारिक अर्थव्यवस्था में नकद लेन-देन की आवश्यकता घट रही है।

निष्कर्ष:
दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता के माहौल के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिरता और लचीलापन दिखाया है। कृषि, उद्योग, सेवाएं और वित्तीय बाजारों की स्थिति, महंगाई पर नियंत्रण और नीति-समर्थ संरचना भारत को अन्य देशों की तुलना में मजबूत स्थिति में रखती है।

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