नई दिल्ली: राहुल गांधी की टिप्पणी पर रवनीत सिंह बिट्टू का पलटवार, कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

New Delhi: Ravneet Singh Bittu retaliates against Rahul Gandhi's remarks, levels serious allegations against the Congress party.

नई दिल्ली— केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उनके साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार करने की स्थिति में आ गए थे।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, “आज कोई गली का गुंडा भी ऐसा व्यवहार नहीं करेगा जैसा राहुल गांधी ने किया। जब मैंने उनसे हाथ नहीं मिलाया तो वह मुझ पर हमला करने ही वाले थे। केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने उन्हें पकड़ा। अगर वे बीच में नहीं आते तो पता नहीं क्या हो जाता।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि राहुल गांधी हमला करने आते तो वे भी जवाब देने में सक्षम थे। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, बहस के बाद वह अंदर चले गए, लेकिन सवाल यह है कि राहुल गांधी किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे और यह क्यों कह रहे थे कि ‘दोबारा मेरे पास ही आओगे’।

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि राहुल गांधी गलतफहमी में हैं। “भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे सम्मान दिया है और कांग्रेस नेताओं के सामने बैठाया है। यही बात राहुल गांधी को पीड़ा देती है। मुझे सामने देखकर उन्हें रोज दर्द होता है और वही दर्द आज उनकी जुबान और व्यवहार में साफ नजर आया।”

इस बीच, बिट्टू ने कांग्रेस पर सिखों के खिलाफ हिंसा कराने के गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा, “ये वही लोग हैं जिनके समर्थकों ने हजारों सिखों की हत्या की, उनके गले में टायर डालकर आग लगा दी गई, गुरुद्वारे तोड़े गए और दरबार साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र अंगों पर गोलियां चलाई गईं। इसलिए कांग्रेस हमेशा सिखों की दुश्मन रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी को इस बात का भी दर्द रहा है कि उनके पिता और दादा दोनों शहीद हुए थे। “जहां भी मैं जाता था और मेरे समर्थन में नारे लगते थे, उससे कांग्रेस को तकलीफ होती थी। कांग्रेस ने पंजाब में हमेशा सिखों को मरवाया। जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने और गांधी राज खत्म हुआ, तब मेरे दादा सरदार बेअंत सिंह मुख्यमंत्री बने। अगर गांधी परिवार सत्ता में होता तो वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने पंजाब में अमन-शांति स्थापित की और सिखों व हिंदुओं के बीच हिंसा का दौर खत्म हुआ। इसी बात का दुख कांग्रेस आज भी मन में रखती है।”

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