लोकसभा ने मनरेगा का नाम बदलने समेत कई प्रावधानों में बदलाव करने वाले विकसित भारत–जी राम जी विधेयक को पारित कर दिया है। इस विधेयक को कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में पेश किया, जिसे बहुमत से मंजूरी मिल गई।
बिल पर संसद में जोरदार बहस देखने को मिली। चर्चा का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया और कहा कि महात्मा गांधी उनके लिए सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि आस्था, प्रेरणा और विश्वास हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बापू का अपमान नहीं कर रही, बल्कि उनके आदर्शों पर चलते हुए गांवों के विकास को केंद्र में रखकर काम कर रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के हंगामे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि देर रात डेढ़ बजे तक उन्होंने सदस्यों की बातें सुनीं और जवाब देना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि अपनी बात कहकर दूसरों की बात न सुनना लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संविधान की भावना के खिलाफ है, जो बापू के सिद्धांतों के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष गांवों के विकास से जुड़े इस विधेयक का विरोध कर रहा है, जो समझ से परे है। शिवराज ने दोहराया कि सरकार किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करती और चेन्नई से गुवाहाटी, कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा देश एक है। इसी दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा बिल की प्रतियां फाड़कर फेंकने का भी आरोप लगा।
महात्मा गांधी को याद करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा ने बापू के सिद्धांतों को अपनी पंच निष्ठाओं में शामिल किया है। गांधी जी मानते थे कि गांव भारत की आत्मा हैं और गांव मजबूत होंगे तभी देश मजबूत होगा। यह विधेयक उसी विचारधारा से प्रेरित है।
मनरेगा के नाम को लेकर उन्होंने कहा कि शुरुआत में योजना का नाम महात्मा गांधी पर नहीं था और वर्ष 2009 के चुनाव के समय उनके नाम को जोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने का काम मोदी सरकार ने किया है और इसके समर्थन में मानव श्रम दिवस व बजटीय खर्च के आंकड़े सदन में रखे।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नाम रखने की “सनक” कांग्रेस में रही है। उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखी गई योजनाओं, संस्थानों और राष्ट्रीय उद्यानों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि गांधी जी के नाम पर वास्तव में कितनी योजनाएं चलाई गईं।
अंत में शिवराज ने कहा कि सरकार ढोंग में नहीं, बल्कि काम में विश्वास रखती है और गांवों के सशक्तीकरण के लिए जरूरी सुधारों के साथ यह नया विधेयक लाया गया है।