आगरा, 25 फरवरी 2026 (चौथी वाणी)। Dr. Bhimrao Ambedkar University के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में गांधी विचार मंच और सर्वोदय समाज द्वारा आयोजित गांधी स्मृति यात्रा के आगमन पर “गांधी विचार की प्रासंगिकता” विषय पर एक महत्वपूर्ण परीसंवाद का आयोजन विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध गांधीवादी शशिभूषण शिरोमणि जी ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक गांधी अध्ययन पीठ डॉ. राजेश कुशवाहा द्वारा स्वागत वक्तव्य से हुआ। उन्होंने परीसंवाद के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए गांधी स्मृति यात्रा के महत्व को रेखांकित किया तथा यात्रियों का अभिनंदन किया।
समाज विज्ञान के अधिष्ठाता प्रो. यू.एन. शुक्ला ने अपने वक्तव्य में Mahatma Gandhi के विचारों का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने रामायण और गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी के लिए गीता ‘माता’ के समान थी। गांधीजी ने सभी धर्मों के मूल तत्वों को आत्मसात किया था। उन्होंने गांधी के एकादश व्रतों की व्याख्या करते हुए उनके व्यावहारिक प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गांधी का विचार मूलतः मानवता का विचार है और भारत समन्वय की भूमि है। हमें अपनी सांस्कृतिक समन्वय परंपरा को समृद्ध करना चाहिए।
यात्रा के संयोजक एवं गांधी विचार मंच के अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार ने कहा कि गांधी को मानना या न मानना व्यक्तिगत विषय हो सकता है, लेकिन उन्हें सही परिप्रेक्ष्य में जानना आवश्यक है। गांधी को उनके जीवन, कृतित्व और लेखन के आधार पर समझा जाना चाहिए। दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत तक उनका संघर्ष क्रमागत विकास की एक सतत गाथा है।
विजय कुमार ने सर्वोदय और अहिंसा के मूल तत्वों का विश्लेषण करते हुए वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अहिंसा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकास और हिंसा की अंधी दौड़ में जहां दुनिया पहुंच गई है, वहां अहिंसा ही एकमात्र विकल्प है। यदि हमें मानवता को बचाना है तो गांधी ही भविष्य का मार्ग हैं। उन्होंने Bhagat Singh का उल्लेख करते हुए कहा कि तथ्यों के आधार पर इतिहास को समझना चाहिए, न कि आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर।
चंद्रभूषण जी ने कहा कि आज गांधी व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार के रूप में हमारे बीच उपस्थित हैं। वर्तमान सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान गांधी के विचारों में निहित है। उन्होंने कहा कि लोक स्मृति में गांधी आज भी जीवित हैं और नवयुवकों के बीच उनके वास्तविक स्वरूप को प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है। खादी और भूदान गांधी तथा Vinoba Bhave की अमूल्य विरासत है और समाज उसके संरक्षण का ट्रस्टी है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शशिभूषण शिरोमणि जी ने भावुक स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि जब गांधीजी की हत्या हुई, उस समय वे अपने पिताजी के साथ वहां उपस्थित थे और उस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के योगदान और खादी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज भी खादी और ग्रामोद्योग के माध्यम से व्यापक स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. राजेश कुशवाहा ने कहा कि विचार दिखते नहीं, लेकिन वे मन और समाज को गहराई से प्रभावित करते हैं। विचार ही समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम हैं। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संस्कृति का चक्रीय परिवर्तन स्वाभाविक है, किंतु हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के मूल्यों को नहीं छोड़ना चाहिए। बाहरी प्रभाव अवश्य आएंगे, परंतु अपनी परंपरा के उदात्त मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है। सामाजिक सद्भाव के लिए निरंतर प्रयास अनिवार्य हैं।
गांधी स्मृति यात्रा 25 फरवरी को आगरा से प्रस्थान कर Fatehpur Sikri, Bharatpur होते हुए Ajmer के लिए रवाना हुई।