प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क को अंतरिम राहत दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में संभल की एमपी/एमएलए विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
सांसद बर्क ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर विशेष अदालत में चल रही पूरी कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की थी। इस याचिका पर जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ सुनवाई कर रही है।
क्या है मामला?
4 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना के बाद सपा सांसद बर्क के खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया।
सांसद का पक्ष
सांसद बर्क ने सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका दावा है कि घटना के दिन वह बेंगलुरु में मौजूद थे, और एफआईआर की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दिल्ली में रुकने का फैसला किया ताकि स्थिति और न बिगड़े। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने समुदाय के लोगों से संपर्क कर शांति बनाए रखने की अपील की थी।
क्या हैं पुलिस के आरोप?
संभल पुलिस का आरोप है कि हिंसा से कुछ दिन पहले बर्क ने मस्जिद में भड़काऊ भाषण दिया था, जिससे माहौल बिगड़ा। एफआईआर में स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल का भी नाम है, जिन्हें इस हिंसा में सह-आरोपी बताया गया है।
बर्क की याचिका में क्या कहा गया?
बर्क ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि यह मामला उन्हें और उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का प्रयास है। उन्होंने आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि उनकी गिरफ्तारी से उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।
निष्कर्ष
फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से सांसद जिया उर रहमान बर्क को अगली सुनवाई तक राहत मिल गई है। कोर्ट के अंतिम निर्णय का सभी पक्षों को इंतजार है।